विदेश की खबरें | प्राकृतिक गैस की खरीद के लिए अधिकतम मूल्य सीमा तय करने में जुटा यूरोपीय संघ
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. यूरोप को मौजूदा ऊर्जा संकट से बचाने के प्रयासों के तहत 27 देशों का संगठन प्राकृतिक गैस की खरीद के लिए मूल्य की अधिकतम सीमा तय करने का प्रयास कर रहा है। ऊर्जा संकट के कारण ऐसी आशंका है कि सर्दियों में यूरोपीय देशों में बिजली आपूर्ति बाधित हो सकती है, कारखानों को बंद करने की भी नौबत आ सकती है और कोविड के कारण पहले से लचर हो चुकी अर्थव्यवस्था फिर पटरी से उतर सकती है।
यूरोप को मौजूदा ऊर्जा संकट से बचाने के प्रयासों के तहत 27 देशों का संगठन प्राकृतिक गैस की खरीद के लिए मूल्य की अधिकतम सीमा तय करने का प्रयास कर रहा है। ऊर्जा संकट के कारण ऐसी आशंका है कि सर्दियों में यूरोपीय देशों में बिजली आपूर्ति बाधित हो सकती है, कारखानों को बंद करने की भी नौबत आ सकती है और कोविड के कारण पहले से लचर हो चुकी अर्थव्यवस्था फिर पटरी से उतर सकती है।
गौरतलब है कि यूक्रेन-रूस युद्ध में यूरोपीय संघ ने हथियारों, धन, सहायता और मॉस्को पर प्रतिबंध लगाकर यूक्रेन का साथ दिया है और इसके प्रतिक्रियास्वरूप रूस ने यूरोपीय संघ के 13 देशों को प्राकृतिक गैस की आपूर्ति में कमी कर दी है।
भविष्य में गैस की आपूर्ति में कमी के अनुमान के बाद इन देशों में गैस और बिजली की कीमतों में तेजी से वृद्धि हुई है और सर्दियों के दौरान कीमतों के और बढ़ने की आशंका है।
फिलहाल मूल्य की अधिकतम सीमा तय करने का प्रयास कर रहे यूरोपीय संघ के समक्ष सबसे बड़ी परेशानी यह है कि प्रत्येक सदस्य देश अलग-अलग ऊर्जा स्रोतों और आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भर हैं और वे साथ मिलकर आगे बढ़ने के मामले में एकमत नहीं हैं।
लातविया के प्रधानमंत्री क्रिस्जानिस करीन्स का कहना है, ‘‘गैस की खरीद के लिए अधिकतम मूल्य की सीमा- अगर यह हो जाता है तो बहुत बड़ी बात होगी... लेकिन शर्त यह है कि हम आपूर्ति को बाधित नहीं कर सकते हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हम ऐसी कीमत नहीं तय कर सकते हैं कि कोई यूरोप को गैस ही नहीं बेचे।’’
वहीं, बेल्जियम के प्रधानमंत्री एलेक्सजेंडर डी’ क्रू ने कहा कि वह आशा करते हैं कि बैठक में कीमत निर्धारण में आ रही समस्याओं को दूर कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि नेताओं को दो संदेश देने के लिए काम करना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘एक ऊर्जा बाजार को... यह स्पष्ट करना चाहिए कि हम इन कीमतों को स्वीकार नहीं करते हैं और हम ये बढ़ी हुई बाजार कीमत नहीं देंगे। दूसरा, हमारी जनता, कंपनियों आदि को महत्वपूर्ण संदेश देना होगा कि हम समस्या को जड़ से समाप्त करेंगे।’’
हालांकि, कीमत की सीमा तय करने में बड़ा रोड़ा जर्मनी का फैसला भी है। जर्मनी ने अपने उपभोक्तओं और उद्योगों के लिए प्राकृतिक गैस की कीमतों को नियंत्रित रखने के लक्ष्य से 200 अरब यूरो खर्च करने का फैसला लिया है।
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