पर्यावरण विशेषज्ञों की राय में स्थायी नहीं है, कार्बन उत्सर्जन में कमी और साफ आसमान का यह दौर
पर्यावरण विशेषज्ञों के मुताबिक दूषित हो चुकी नदियों का पानी और धुंध भरे वातारण में आसमान का रंग, लॉकडाउन के दौरान बदल कर कुछ समय के लिये ही नीला दिख रहा है। जानकारों की राय में कार्बन उत्सर्जन में कमी के कारण वातावरण में दिख रहा बदलाव, पर्यावरण के लिहाज से लंबे समय तक नहीं टिकेगा।
नयी दिल्ली, नौ अप्रैल कोरोना संकट से निपटने के लिये लागू किये गये 21 दिन के लॉकडाउन के दौरान उद्योग, वाहन एवं अन्य कारणों से होने वाले प्रदूषण में इन दिनों आयी गिरावट को स्थायी मानना भूल होगी।
पर्यावरण विशेषज्ञों के मुताबिक दूषित हो चुकी नदियों का पानी और धुंध भरे वातारण में आसमान का रंग, लॉकडाउन के दौरान बदल कर कुछ समय के लिये ही नीला दिख रहा है। जानकारों की राय में कार्बन उत्सर्जन में कमी के कारण वातावरण में दिख रहा बदलाव, पर्यावरण के लिहाज से लंबे समय तक नहीं टिकेगा।
उल्लेखनीय है कि हाल ही में केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 22 मार्च को लागू किये गये जनता कर्फ्यू के प्रभाव को दर्शाने वाली अपनी रिपोर्ट में कहा था कि सड़कों पर वाहन नहीं निकलने के कारण 21 मार्च की तुलना में वातावरण में नाइट्रोजन ऑक्साइड के स्तर में 51 प्रतिशत और कार्बन डाई ऑक्साइड में 32 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गयी। इसके बाद कोरोना का संक्रमण फैलने से रोकने के लिये लागू किये गये लॉकडाउन के दौरान दो सप्ताह के भीतर न सिर्फ हवा की गुणवत्ता में खासा सुधार हुआ बल्कि कारखाने बंद होने कारण दिल्ली में यमुना सहित देश के अन्य इलाकों में दूषित हो चुकी तमाम नदियों का पानी भी साफ नजर आने लगा है।
हालांकि, पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि लॉकडाउन के दौरान कार्बन उत्सर्जन में भले ही काफी गिरावट आई हो लेकिन कोरोना संकट के दौर से उबरने के बाद जैसे ही जनजीवन सामान्य होगा, वैसे ही पर्यावरण के लिये कोरोना संकट से पहले की स्थिति वापस लौट आयेगी।
पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में कार्यरत संस्था, ग्रीनपीस के विशेषज्ञ अविनाश चंचल ने कहा कि पर्यावरण की मौजूदा स्थिति लंबे समय के लिये लाभकारी साबित नहीं होगी। उन्होंने कहा कि कोरोना के संकट से जूझ रही समूची दुनिया में अपने घर से ही काम करने वालों की संख्या बहुत अधिक नहीं है। इसलिये यह नहीं कहा जा सकता है कि उत्सर्जन में कमी का वर्तमान स्तर आगे भी जारी रह सकेगा।
वैकल्पिक ईंधन वाले वाहनों के संगठन ‘इंडिया ऑटो एलपीजी कॉयलीशन’ के महानिदेशक सुयश गुप्ता ने भी इस विचार से सहमति व्यक्त करते हुये कहा कि अधिकांश शहरों में लंबे समय बाद साफ हवा में सांस लेना मुमकिन हो पाया है। लेकिन लॉकडाउन के कारण आये इस बदलाव के स्थायी होने की उम्मीद नहीं की जा सकती है।
आईआईटी, भुवनेश्वर के सहायक प्रोफेसर वी विनोज ने कहा कि लंबे समय के लॉकडाउन के कारण कार्बन उत्सर्जन में कमी जरूरआयी है लेकिन सामान्य दिनों की तरह ही व्यवस्थायें बहाल होने पर पर्यावरण का दौर वापस लौटने की आशंका से भी इंकार नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर कार्बन उत्सर्जन में गिरावट आयी है, इसकी मुख्य वजह पिछले कुछ समय में परिवहन के साधनों का थमना है।
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(The above story first appeared on LatestLY on Apr 09, 2020 03:51 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

