देश की खबरें | पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव, जापानी समकक्ष ने द्विपक्षीय सहयोग मजबूत करने पर चर्चा की

नयी दिल्ली, 12 जनवरी केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव से बृहस्पतिवार को यहां उनके जापानी समकक्ष अकिहिरो निशिमुरा ने मुलाकात की। दोनों नेताओं ने अर्थव्यवस्था, संसाधन दक्षता, हरित हाइड्रोजन क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा की।

यादव ने भारत-जापान पर्यावरण सप्ताह के उद्घाटन सत्र को भी संबोधित किया और कहा कि दुनिया को जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और जैव विविधता के नुकसान के संकट का मुकाबला करने के लिए उत्पादन और खपत के मुद्दे का तत्काल समाधान करने की जरूरत है।

निशिमुरा के साथ अपनी मुलाकात में, यादव ने दुनिया के सामने उत्पन्न पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘लाइफ’ मंत्र के महत्व पर जोर दिया।

मोदी ने 20 अक्टूबर को मिशन ‘लाइफ’ की शुरुआत की थी, जिसे एक वैश्विक जन-आंदोलन के रूप में देखा गया था, जो पर्यावरण की रक्षा और संरक्षण के लिए व्यक्तिगत एवं सामूहिक कार्रवाई को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।

यादव ने ट्वीट किया, "हमने समुद्री और प्लास्टिक कचरे के साथ-साथ जी7/जी20 सहयोग पर भी बातचीत की। भारत और जापान के बीच द्विपक्षीय सहयोग के तौर-तरीकों पर चर्चा की गई, विशेष रूप से अर्थव्यवस्था और संसाधन दक्षता, कार्बन प्रौद्योगिकी में कमी लाने और हरित हाइड्रोजन के क्षेत्र में।"

उन्होंने कार्यक्रम में अपने संबोधन के दौरान कहा कि रियो संधि के बुनियादी सिद्धांतों द्वारा निर्देशित सामूहिक कार्रवाई पृथ्वी को इन संकटों से बचा सकती है।

यादव ने कहा, "भारत और जापान ने क्रमशः जी20 और जी7 की अध्यक्षता संभाली है। यह दोनों देशों के लिए वसुधैव कुटुम्बकम या 'वन अर्थ, वन फैमिली, वन फ्यूचर' (एक धरती, एक परिवार, एक भविष्य) की दिशा में दुनिया के भविष्य को आकार देने के लिए एजेंडा और प्राथमिकताएं निर्धारित करने का एक अवसर है जो भारत की जी20 अध्यक्षता का भी विषय है।"

उन्होंने कहा कि यह दोनों देशों के लिए जलवायु परिवर्तन, समुद्री कचरे, वायु प्रदूषण और टिकाऊ परिवहन और प्रौद्योगिकियों से संबंधित चुनौतियों और समाधानों पर चर्चा करने का एक अवसर है, जिससे हरित और टिकाऊ भविष्य की दिशा में मार्ग प्रशस्त करने में मदद मिलेगी।

मंत्री ने कहा, "हमारा दृढ़ विश्वास है कि जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और जैव विविधता के नुकसान की ग्रह संबंधी चुनौतियों से धरती को बचाने के लिए, हमें रियो संधि के बुनियादी सिद्धांतों द्वारा निर्देशित सामूहिक कार्रवाई की आवश्यकता है। यदि हमें संकट का मुकाबला करना है तो उत्पादन और खपत पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है।"

उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन से निपटने के वैश्विक प्रयासों में स्थायी जीवनशैली और उत्पादन एवं खपत के पैटर्न के महत्व को मिस्र के शर्म अल शेख में हाल ही में संपन्न सीओपी27 में रेखांकित किया गया था।

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