नयी दिल्ली, 31 जनवरी देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने के प्रावधान वाले विधेयकों पर विचार कर रही संसदीय समिति द्वारा विचार-विमर्श के लिए शुक्रवार को तैयार की गई एक सांकेतिक सूची में उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों के पूर्व न्यायाधीशों, निर्वाचन आयोग, राजनीतिक दलों और राज्य सरकारों का उल्लेख है।
समिति की बैठक में कई विपक्षी सदस्यों ने इस बात पर जोर दिया कि उन्हें हर बैठक के दौरान होने वाली बातचीत के शब्दशः विवरण की एक प्रति वितरित की जानी चाहिए। इस पर समिति के अध्यक्ष पीपी चौधरी ने कहा कि ऐसी मांग संसदीय समितियों द्वारा अपनाई जाने वाली परंपरा के अनुरूप नहीं है।
हालाँकि, द्रमुक के सांसद पी विल्सन और कांग्रेस के मनीष तिवारी जैसे सदस्यों ने इस बात पर जोर दिया कि उनकी मांग संसदीय समितियों को निर्देशित करने वाले नियमों के अंतर्गत आती है।
चौधरी ने कहा कि वह इस मुद्दे पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की राय मांगेंगे।
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाद्रा ने अपने विपक्षी सहयोगियों के विचार का समर्थन किया।
जब सत्तारूढ़ दल के एक सदस्य ने यह सुझाव दिया कि 'एक देश, एक चुनाव' के विचार पर जागरूकता बढ़ाने की प्रकिया में शैक्षणिक संस्थानों को शामिल किया जा सकता है, तो कुछ विपक्षी सदस्यों ने यह कहते हुए आपत्ति जताई कि यह संयुक्त संसदीय समिति के दायरे से बाहर है।
बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए चौधरी ने कहा कि विभिन्न निकायों और अन्य हितधारकों की एक सांकेतिक सूची तैयार की गई थी और सदस्यों को विचार के लिए और अधिक नाम सुझाने के लिए कहा गया था।
उन्होंने कहा, ''हम सभी हितधारकों की राय लेंगे। इसमें लिखित के साथ-साथ मौखिक प्रस्तुतियां भी दी जाएंगी।''
उन्होंने शिक्षकों, छात्रों और प्रवासी श्रमिकों सहित अन्य लोगों का हवाला देते हुए कहा कि इन लोगों के विचार जानने के लिए उनसे संपर्क किया जाएगा।
सूत्रों ने कहा कि संवैधानिक विशेषज्ञ, सुरक्षा एजेंसियां, कई सरकारी विभाग, मीडिया संगठन, भारतीय विधि आयोग, बार काउंसिल ऑफ इंडिया, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम, थिंक-टैंक, चैंबर ऑफ कॉमर्स, आईआईएम जैसे शैक्षणिक संस्थान उनमें शामिल हैं, जिनके साथ विचार-विमर्श किया जा सकता है।
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