जरुरी जानकारी | विदेशों में मजबूती, कम दाम पर किसानों के बिकवाली से बचने से खाद्य तेल-तिलहन कीमतें मजबूत
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. विदेशों में तेजी के रुख के बीच देश के किसानों द्वारा अपनी तिलहन फसलों को सस्ते में बेचने से बचने के कारण दिल्ली तेल- तिलहन बाजार में सोमवार को सरसों तिलहन, सोयाबीन तेल-तिलहन और बिनौला तेल (देशी तेल तिलहन) के अलावा आयातित कच्चे पामतेल (सीपीओ) एवं पामोलीन के भाव में मजबूती देखने को मिली जबकि देशी मूंगफली तेल-तिलहन और सरसों तेल के भाव पूर्वस्तर पर बंद हुए।
नयी दिल्ली, तीन अप्रैल विदेशों में तेजी के रुख के बीच देश के किसानों द्वारा अपनी तिलहन फसलों को सस्ते में बेचने से बचने के कारण दिल्ली तेल- तिलहन बाजार में सोमवार को सरसों तिलहन, सोयाबीन तेल-तिलहन और बिनौला तेल (देशी तेल तिलहन) के अलावा आयातित कच्चे पामतेल (सीपीओ) एवं पामोलीन के भाव में मजबूती देखने को मिली जबकि देशी मूंगफली तेल-तिलहन और सरसों तेल के भाव पूर्वस्तर पर बंद हुए।
बाजार सूत्रों ने कहा कि मलेशिया एक्सचेंज में 3.5 प्रतिशत की तेजी रही जबकि शिकॉगो एक्सचेंज फिलहाल लगभग तीन प्रतिशत मजबूत है।
सूत्रों ने कहा कि आयातित तेल सस्ता होने के कारण सरसों तेल की मांग कम है। इस वजह से सरसों तेल के भाव पूर्वस्तर पर बने रहे जबकि कारोबार कमजोर रहने से मूंगफली तेल-तिलहन के भाव में भी बदलाव नहीं हुआ। संभवत: पहली बार ‘सॉफ्ट ऑयल’ (नरम तेलों) का थोक भाव पामोलीन से भी सस्ता हो चला है। अब सरकार आयात या कोई अन्य शुल्क लगाये तो भी कोई फायदा नहीं होने वाला है। क्योंकि 31 मार्च तक जो शुल्कमुक्त आयात के ऑर्डर हो चुके हैं। वह खाद्य तेल मई माह के मध्य तक देश में आता रहेगा। इस बीच सरसों तो किसी भी हाल में खप नहीं पायेगा। देश के तेल उद्योग अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है जब देशी तिलहनों की पेराई में उसे नुकसान झेलना पड़ रहा है। देशी तेलों की लागत अधिक बैठती है यानी यह लागत लगभग 135 रुपये लीटर बैठती है जबकि शुल्कमुक्त आयातित सूरजमुखी तेल उपभोक्ताओं को बंदरगाह पर 78 रुपये किलो के भाव उपलब्ध है। यह अलग बात है कि खुदरा में यह तेल अभी भी प्रीमियम राशि के साथ बेचे जाने के कारण महंगा है।
सूत्रों ने कहा कि पामोलीन खाने वाले कम आय वर्ग के गरीब लोग और रेहड़ी पटरी पर खाद्य कारोबार करने वाले दुकानदार को सूरजमुखी तेल सस्ते में उपलब्ध नहीं हो रहा क्योंकि खुदरा में भी वह प्रीमियम राशि के साथ बिक रहा है। सूत्रों ने कहा कि तेल उद्योग तो अब मायूस हो चुका है। अब अगर मुद्रास्फीति को नियंत्रित करना हो और पामोलीन को सस्ता करने के लिए उसपर लगने वाले 13.75 प्रतिशत के आयात शुल्क को कम कर देना चाहिये। स्थिति ऐसी हो गयी है कि पामोलीन के आयात में नुकसान की स्थिति हो रही है क्योंकि नरम तेल थोक बाजार में काफी सस्ते में मिल रहा है। रिफाइंड सूरजमुखी थोक में 10-15 रुपये ऊंचा बिक रहा है जबकि यही तेल खुदरा बाजार में 50-60 रुपये अधिक दाम पर बेचा जा रहा है।
सूत्रों ने कहा कि किसानों को पिछले वर्ष प्रति क्विंटल सरसों का 6,500-7,000 रुपये का भाव मिले थे। इस साल 5,350-5,400 रुपये क्विंटल का भाव मिल रहा है। इसी प्रकार पिछले साल सोयाबीन के लिए किसानों को 7,000-7,500 रुपये क्विंटल का भाव मिला था जो इस बार घटकर 5,500 रुपये रह गया है। ऐसे में किसान अपनी फसल बेचने से बच रहे हैं।
सूत्रों ने कहा कि मौजूदा स्थिति देश की आयात पर निर्भरता बढ़ा सकती है तथा सरसों एवं सोयाबीन की पेराई नहीं होने से आगे आयात और बढ़ेगा। सबसे बड़ी मुश्किल तो खल के मामले में आयेगी जिसे बड़ी मात्रा में आयात भी करना मुश्किल है। ऐसे में दूध के दाम आगे और बढ़ सकते हैं जिसकी खपत खाद्यतेल से कई गुना अधिक है। खाद्य तेल सस्ता होने से दूध के दाम बढ़ते हैं जबकि दूध के दाम कम होने से तेल मिलें चलती हैं, आयात पर निर्भरता कम होने से विदेशी मुद्रा की बचत होती है और कई अन्य फायदे हैं। सोपा जैसे कई तेल संगठनों ने भी देश के तेल उद्योग के बारे में कई बार अपनी चिंतायें रखी हैं लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है।
सूत्रों ने कहा कि देशी तेल-तिलहन का उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ इन तेलों के लिए बाजार बनाना या विकसित करना भी काफी अहमियत रखता है और यह काम देशहित का है।
सोमवार को तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:
सरसों तिलहन - 5,560-5,635 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली - 6,815-6,875 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) - 16,700 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली रिफाइंड तेल 2,545-2,810 रुपये प्रति टिन।
सरसों तेल दादरी- 10,950 रुपये प्रति क्विंटल।
सरसों पक्की घानी- 1,715-1,785 रुपये प्रति टिन।
सरसों कच्ची घानी- 1,715-1,835 रुपये प्रति टिन।
तिल तेल मिल डिलिवरी - 18,900-21,000 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 11,400 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 11,300 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 9,700 रुपये प्रति क्विंटल।
सीपीओ एक्स-कांडला- 9,100 रुपये प्रति क्विंटल।
बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 10,050 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 10,500 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन एक्स- कांडला- 9,700 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।
सोयाबीन दाना - 5,450-5,500 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन लूज- 5,200-5,300 रुपये प्रति क्विंटल।
मक्का खल (सरिस्का)- 4,010 रुपये प्रति क्विंटल।
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(The above story first appeared on LatestLY on Apr 03, 2023 09:58 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

