नयी दिल्ली/रांची, छह मई प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने झारखंड के खूंटी जिले में मनरेगा कोष में 18 करोड़ रुपये से अधिक के कथित गबन से जुड़े धन शोधन के एक मामले में झारखंड की खनन सचिव पूजा सिंघल और उनके परिवार के परिसर सहित कई अन्य ठिकानों पर बृहस्पतिवार को छापेमारी की। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
एजेंसी ने राज्य की राजधानी रांची में दो परिसरों पर छापेमारी के दौरान कुल 19.31 करोड़ रुपये की नकदी जब्त की।
अधिकारियों ने कहा कि रांची में रहने वाले चार्टर्ड अकाउंटेंट-वित्तीय सलाहकार के परिसर से लगभग 17.51 करोड़ रुपये नकद बरामद किए गए हैं, जिनके सिघंल और उनके परिवार के साथ संबंधों की जांच की जा रही हैं।
अधिकारियों ने कहा कि इसके अलावा शहर में एक अन्य स्थान से 1.8 करोड़ रुपये नकदी बरामद की गई है।
मामला 2008 से 2011 के बीच का है।
उन्होंने बताया कि झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल और कुछ अन्य राज्यों में 18 परिसरों में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत छापेमारी की जा रही है।
अधिकारियों के मुताबिक, भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) की अधिकारी एवं झारखंड सरकार के खदान एवं भूविज्ञान विभाग की सचिव पूजा सिंघल के परिसर की भी तलाशी की जा रही है।
सिंघल 2000 बैच की आईएएस अधिकारी हैं और पहले खूंटी जिले में उपायुक्त के रूप में तैनात थीं।
एजेंसी के अधिकारियों द्वारा रांची में एक अस्पताल सहित कुछ अन्य स्थानों पर भी छापेमारी की जा रही है। केन्द्रीय रिज़र्व पुलिस बल के कर्मी उन्हें सुरक्षा प्रदान कर रहे हैं।
झारखंड के गोड्डा से भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने आरोप लगाया कि छापेमारी से पता चलता है कि झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने ''भ्रष्टाचार के मामले में पिछली मधु कोड़ा सरकार को पीछे छोड़ दिया है।''
ईडी ने कोड़ा को 2009 में धनशोधन के एक मामले में गिरफ्तार किया था।
दुबे ने 'पीटीआई-' से कहा, ''इससे राज्य में भ्रष्टाचार के स्तर का पता चलता है...राज्य में बिना धन और रिश्वत के कुछ नहीं होता।''
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