नयी दिल्ली, 13 फरवरी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने धनशोधन के एक मामले में जेल में बंद आम आदमी पार्टी (आप) के नेता एवं केजरीवाल सरकार के मंत्री सत्येंद्र जैन की जमानत अर्जी का दिल्ली उच्च न्यायालय के समक्ष सोमवार को पुरजोर विरोध किया।
पिछले वर्ष 30 मई को गिरफ्तार किये गये जैन कथित तौर पर उनसे जुड़ी चार कंपनियों के माध्यम से धनशोधन करने के आरोपी हैं।
ईडी की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) एस. वी. राजू ने न्यायमूर्ति दिनेश कुमार शर्मा की एकल पीठ के समक्ष दलील दी कि आप नेता का यह कहना है कि अपराध की कमाई का कोई सबूत नहीं है, लेकिन रिकॉर्ड पर उपलब्ध साक्ष्य चीख-चीखकर इन आरोपों की तश्दीक करते हैं।
प्रवर्तन निदेशालय ने अदालत के समक्ष दायर अपने जवाब में कहा है कि जैन की जमानत याचिका खारिज की जानी चाहिए क्योंकि उनकी रिहाई से जांच प्रभावित होगी। जांच एजेंसी ने कहा है कि तिहाड़ जेल से बरामद सीसीटीवी फुटेज में इस बात के पुख्ता सबूत हैं कि जैन प्रभावशाली व्यक्ति हैं, जो गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं और कार्यवाही को प्रभावित कर सकते हैं।
राजू ने अपनी दलील में कहा, ‘‘धनशोधन का मामला स्पष्ट है। उनका मामला है कि सत्येंद्र जैन का इस मामले से कोई लेना देना नहीं है, लेकिन मुझे यह स्थापित करना है कि सत्येंद्र जैन इसमें गहरे पैठे हैं।’’
ईडी ने अपने जवाब में कहा है कि इस बात के ‘‘स्पष्ट साक्ष्य’’ मौजूद हैं कि जैन तिहाड़ जेल में बंद सह-अभियुक्त वैभव जैन और अंकुश जैन को प्रभावित कर रहे हैं।
इसने यह भी कहा है कि जैन जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं और वह टालमटोल वाला जवाब दे रहे हैं।
अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 21 फरवरी की तारीख मुकर्रर की है।
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