नयी दिल्ली, नौ सितंबर प्रवर्तन निदेशालय ने बेंगलुरु में चर्च ऑफ साउथ इंडिया ट्रस्ट एसोसिएशन (सीएसआईटीए) की 60 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क कर ली। यह कार्रवाई रक्षा मंत्रालय द्वारा उसे पट्टे पर दी गयी भूमि को उसे द्वारा कथित रूप से गैरकानूनी रूप से स्थानांतरित करने के सिलसिले में की गयी है।
ईडी ने एक बयान में बताया कि कुर्क की गई संपत्ति भारतीय स्टेट बैंक में रखी गई सावधि जमा की शक्ल में हैं और यह कार्रवाई धनशोधन रोकथाम अधिनियम 2002 (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत की गई है।
ईडी के मुताबिक, बेंगलुरु के अशोक नगर थाने में दर्ज प्राथमिकी के आधार पर जांच शुरू की गई थी। यह प्राथमिकी रक्षा मंत्रालय के 74426.886 वर्ग मीटर भूमि के टुकड़े को "बेईमानी से" स्थानांतरण करने का समझौता करने को लेकर सीएसआईटीए के खिलाफ दर्ज की गई थी।
यह भूमि पहले बेंगलुरु में ऑल सैंट्स चर्च को पट्टे पर दी गई थी।
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ऑल सैंट्स चर्च के आहते के एक हिस्से को सीएसआईटीए ने कर्नाटक सरकार के उपक्रम बेंगलुरु मेट्रो रेल निगम लिमिटिड (बीएमआरसीएल) को 2019 में कथित रूप से स्थानांतरित कर दिया और 59.29 करोड़ रुपये का मुआवजा हासिल किया। बीएमआरसीएल ने यह जमीन कर्नाटक औद्योगिक क्षेत्र विकास बोर्ड (केआईएडीबी) के जरिए ली।
ईडी ने कहा कि जांच में पता चला कि जमीन का मालिकाना हक भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के पास है और यह धार्मिक कार्यों के लिए ऑल सैंट्स चर्च को पट्टे पर दी गई थी और जमीन का मालिकाना हक कभी भी चर्च को स्थानांतरित नहीं किया गया था।
ईडी ने कहा कि सीएसआईटीए ने रक्षा मंत्रालय की जमीन को कथित रूप से बीएमआरसील को स्थानांतरित कर दी।
एजेंसी ने कहा कि जमीन का कानूनी मालिक रक्षा मंत्रालय है इसलिए मुआवजे की रकम भारत के समेकित कोष में जानी चाहिए थी।
उसने कहा कि ब्याज समेत 59.52 करोड़ रुपये की राशि को पीएमएलए के तहत अस्थायी तौर पर कुर्क कर लिया गया है।
मामले की जांच की जा रही है।
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