नयी दिल्ली/रांची, सात मई झारखंड के खूंटी जिले में मनरेगा कोष की कथित हेराफेरी से संबंधित मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने शनिवार को धन शोधन (निवारण) अधिनियम (पीएमएलए) के तहत एक चार्टर्ड अकाउंटेंट को गिरफ्तार किया। अधिकारियों ने बताया कि इस मामले में राज्य की खनन सचिव और आईएएस अधिकारी पूजा सिंघल और अन्य के ठिकानों पर छापेमारी की गई थी।
अधिकारियों ने बताया कि सीए सुमन कुमार को रांची में शाम करीब पांच बजे पीएमएलए के तहत हिरासत में लिया गया ।
अधिकारियों ने आरोप लगाया कि एजेंसी द्वारा इस मामले में छापेमारी करने के बाद रांची में उनके परिसर से कथित तौर पर 17.79 करोड़ रुपये की नकदी की बरामदगी के संबंध में सीए सवालों का “जवाब देने में टालमटोल” कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि सीए को एक स्थानीय अदालत के समक्ष पेश किया जाएगा जहां प्रवर्तन निदेशालय उनकी हिरासत की मांग करेगा।
ईडी का आरोप है कि कुमार का आईएएस अधिकारी पूजा सिंघल और उनके परिवार से भी संबंध है तथा वह उनके वित्तीय सलाहकार भी हैं।
केंद्रीय एजेंसी ने छह मई को झारखंड, बिहार और पश्चिम बंगाल में कई जगहों पर की गई छापेमारी के दौरान 19.31 करोड़ की नकदी जब्त की थी। उसने छापेमारी के दौरान सिंघल का प्रारंभिक बयान भी दर्ज किया था।
छापेमारी जिस धन शोधन के मामले में की जा रही है, वह झारखंड के कनिष्ठ अभियंता राम बिनोद प्रसाद सिन्हा के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय द्वारा पीएमएलए के तहत दर्ज मामले से जुड़ा है। पीएमएलए के तहत मामला दर्ज होने के बाद सिन्हा को 17 जून 2020 को पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले से प्रवर्तन निदेशालय ने गिरफ्तार कर लिया था।
केंद्रीय एजेंसी ने झारखंड सतर्कता ब्यूरो द्वारा सिन्हा के खिलाफ दर्ज की गई 16 प्राथमिकी और आरोपपत्रों का संज्ञान लिया था। इनमें सिन्हा पर अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग करने, जालसाजी और धन की हेराफेरी के जरिये 18.6 करोड़ रुपये के सरकारी धन का गबन करने का आरोप लगाया गया था।
सिन्हा पर 2017 में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की आपराधिक धाराओं के तहत धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार से संबंधित आपराधिक धाराओं के तहत 1 अप्रैल 2008 से 21 मार्च 2011 तक कनिष्ठ अभियंता रहते हुए सार्वजनिक धन के कथित रूप से हेरफेर और इसे अपने नाम के साथ-साथ अपने परिवार के सदस्यों के नाम पर निवेश करने के लिए मामला दर्ज किया गया था।
एजेंसी ने पहले कहा था कि उक्त धनराशि खूंटी जिले में मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) के तहत सरकारी परियोजनाओं के निष्पादन के लिए निर्धारित की गई थी।
भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) की 2000 बैच की अधिकारी सिंघल पहले खूंटी जिले में उपायुक्त के पद पर तैनात थीं।
एजेंसी ने पहले कहा था कि ईडी ने दिसंबर, 2018 में सिन्हा के खिलाफ आरोप पत्र भी दायर किया और रांची की एक विशेष अदालत ने बाद में उन्हें पेश होने के लिए समन जारी किया, जिसका उन्होंने (सिन्हा ने) सम्मान नहीं किया।
अदालत ने तब सिन्हा के खिलाफ एक गैर-जमानती वारंट जारी किया जिसके आधार पर ईडी ने उसके खिलाफ तलाशी अभियान शुरू किया और पश्चिम बंगाल में उसके ठिकाने से उसकी गिरफ्तारी की गई।
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