आर्थिक पैकेज से निराशा हुई, गरीबों और मध्य वर्ग के लिए कुछ नहीं: कांग्रेस

पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने सरकार से यह आग्रह भी किया कि वह देश के कमजोर वर्ग के 13 करोड़ लोगों के खातों में पैसे डाले।

जमात

नयी दिल्ली, 13 मई वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से आर्थिक पैकेज का ब्यौरा देश के समक्ष रखे जाने के बाद कांग्रेस ने बुधवार को दावा किया कि इस पैकेज से निराशा हुई है क्योंकि इसमें गरीबों, प्रवासी श्रमिकों और मध्य वर्ग के लिए कुछ नहीं है।

पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने सरकार से यह आग्रह भी किया कि वह देश के कमजोर वर्ग के 13 करोड़ लोगों के खातों में पैसे डाले।

चिदंबरम ने वीडियो लिंक के माध्यम से संवाददाताओं से कहा, ‘‘पिछली रात प्रधानमंत्री ने पैकेज की घोषणा की थी, हालांकि कुछ ब्यौरा नहीं दिया था। वित्त मंत्री से बहुत उम्मीदें थीं, लेकिन उन्होंने जो घोषणा की उससे हमें निराशा हुई है।

उन्होंने दावा किया कि इस पैकेज में गरीबों और प्रवासी कामगारों के लिए कुछ भी नहीं है। आज सबसे ज्यादा परेशान गरीब और प्रवासी श्रमिक हैं, लेकिन सरकार ने उन्हें असहाय छोड़ दिया।

चिदंबरम के अनुसार, ‘‘इस पैकेज में मध्यम वर्ग के लिए भी कुछ नहीं है। उन्हें कोई वित्तीय सहयोग नहीं दिया गया है। आईटीआर की तारीख बढ़ाई गई है, लेकिन यह वित्तीय सहयोग का कदम नहीं है।’’

उन्होंने कहा कि नीचे की बड़ी आबादी (13 करोड़ लोगों) के खातों में पैसे डालने के बारे में कुछ नहीं कहा गया है।

कांग्रेस नेता ने कहा कि वित्त मंत्री ने एमएसएमई (सूक्ष्म लघु और मध्यम उद्योग) इकाइयों के लिए कुछ सहयोग की घोषणा की, लेकिन यह बड़ी इकाइयों के लिए लाभदायक होगा। इसका फायदा 45 लाख इकाइयों को मिलेगा। मुझे लगता है कि 6.3 करोड़ छोटी इकाइयों को छोड़ दिया गया है।

उन्होंने कहा, ‘‘हम 20 हजार करोड़ रुपये के सबऑर्डिनेट फंड और 10 हजार करोड़ रुपये के कॉर्पस कोष का स्वागत करते हैं, लेकिन इसकी शर्तों के बारे में जानकारी का इंतजार है।’’

चिदंबरम ने कहा, ‘‘सरकार को अधिक खर्च करना चाहिए, उसे ज्यादा उधार लेना चाहिए, उसे राज्यों को अधिक उधार लेने की अनुमति देनी चाहिए, लेकिन ऐसा करने की उसकी इच्छा नहीं है।’’

पूर्व वित्त मंत्री ने कहा कि इस वक्त सरकार को वित्तीय घाटे की चिंता करने के बजाय जरूरतमंद लोगों के हाथों में पैसे देने चाहिए ताकि बाजार में मांग बढ़ाई जा सके।

कुछ राज्यों में श्रम कानूनों में बदलाव के सवाल पर चिदंबरम ने आरोप लगाया कि भाजपा की राज्य सरकारों ने गलत समय पर यह किया है और इससे गलत परिपाटी स्थापित होगी।

कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, ‘‘वित्त मंत्री की घोषणाओं से देश को घोर निराशा हुई है। गरीबों और मजदूरों को फिर उनके हाल पर छोड़ दिया गया।’’

उन्होंने आरोप लगाया कि राष्ट्र निर्माता मजदूर आज ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।

पार्टी प्रवक्ता गौरव वल्लभ ने कहा कि संकट के इस समर्य कर्ज देने की नहीं, बल्कि लोगों के खातों में पैसे डालने की जूरूरत है, लेकिन वित्त मंत्री की घोषणा से गरीबों, मजदूरों और मध्य वर्ग के खातों में एक रुपये नहीं पहुंचेगा।

गौरतलब है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को लघु उद्योगों के लिये बिना गारंटी वाले 3 लाख करोड़ रुपये के कर्ज की सुविधा दिलाने की घोषणा की। साथ ही उन्होंने गैर-वेतन भुगतान पर कर कटौती में एक चौथाई राहत तथा गैर-बैंकिंग कंपनियों को नकदी की अतिरिक्त सुविधा उपलब्ध कराने की योजनाओं का भी ऐलान किया।

इन उपायों का मकसद कोरोना वायरस महामारी और उसकी रोकथाम के लिये जारी ‘लॉकडाउन’ से कंपनियों और इकाइयों को राहत देना है।

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