चीतों को भारत में बसाना होगा आसान? एक्सपर्ट्स को सता रही है यह चिंता
नामीबिया से लाए जाने के बाद पिछले हफ्ते भारत में जंगल में छोड़े गए आठ चीतों से पूर्व 2009 में सिंगापुर से गुजरात के सक्करबाग प्राणी उद्यान सहित विदेशों से लाए गए चीतों के प्रजनन के प्रयास नाकाम हो चुके हैं.
अहमदाबाद, 19 सितंबर: नामीबिया से लाए जाने के बाद पिछले हफ्ते भारत में जंगल में छोड़े गए आठ चीतों से पूर्व 2009 में सिंगापुर से गुजरात के सक्करबाग प्राणी उद्यान सहित विदेशों से लाए गए चीतों के प्रजनन के प्रयास नाकाम हो चुके हैं. अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी. भारत के जंगलों में चीतों को फिर से बसाने के लिए 17 सितंबर को मध्य प्रदेश के कुनो राष्ट्रीय उद्यान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आठ चीतों को छोड़ा गया. इन चीतों को दक्षिणी अफ्रीका के नामीबिया से विमान से लाया गया था. MP: चीतों को चीतल-हिरण खिलाने के मामले ने पकड़ा तूल, BJP नेता बोले- तुरंत रोक लगाए सरकार.
गुजरात सरकार द्वारा 2009 में किए गए प्रयासों को याद करते हुए, राज्य के वन विभाग के अधिकारियों ने कहा कि दो जोड़ी चीते सिंगापुर प्राणी उद्यान से एक एशियाई शेर और दो शेरनी के बदले लाए गए थे. उन्होंने कहा कि 24 मार्च 2009 को तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में एक सार्वजनिक समारोह के बाद जूनागढ़ में देश के सबसे पुराने सक्करबाग प्राणी उद्यान में इन चीतों को लाया गया था.
सक्करबाग प्राणी उद्यान के सहायक निदेशक नीरव मकवाना के एक नोट के अनुसार, जोड़े 2012 तक मिलन करने में नाकाम रहे और स्कॉटलैंड के एक विशेषज्ञ भ्रूणविज्ञानी की देखरेख में प्रजनन के सहायक प्रयास के प्रस्ताव को लागू नहीं किया जा सका.
नोट में कहा गया, ‘‘चीतों के दो जोड़े मार्च 2009 में अदला-बदली कार्यक्रम के तहत सिंगापुर प्राणी उद्यान से लाए गए थे. दरअसल, (सक्करबाग प्राणी उद्यान में) कुशल प्रबंधन और पशु चिकित्सा देखभाल के कारण, जोड़े 12 साल की उम्र तक जिंदा रहे.’’
सिंगापुर प्राणी उद्यान ने 2006 में अफ्रीकी चीतों के बदले सक्करबाग प्राणी उद्यान से एशियाई शेरों को लाने का प्रस्ताव रखा था, और उस वर्ष अगस्त में केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण द्वारा इसे मंजूरी दी गई थी.
जूनागढ़ की मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) आराधना साहू ने कहा, ‘‘63 साल के अंतराल के बाद, मार्च 2009 में दोनों जोड़े एक शेर और दो शेरनी के बदले देश में पहुंचे. बारह साल की उम्र के बाद प्राकृतिक कारणों से दो जोड़े की मृत्यु हो गई. आखिरी चीते की मृत्यु 2017 में हुई.’’
24 मई, 2009 को जूनागढ़ के चिड़ियाघर में दो जोड़े को लाने के लिए आयोजित कार्यक्रम में मोदी ने संवाददाताओं से कहा था कि यह देश में चीतों के सफलतापूर्वक प्रजनन कराने के राज्य सरकार के प्रयासों का हिस्सा है.
नोट में कहा गया कि भारत से विलुप्त होने वाले एशियाई चीतों की आधिकारिक घोषणा 1952 में की गई थी. साथ ही, इसमें कहा गया कि इस प्रजाति के चीते अब केवल ईरान में हैं. नोट में कहा गया कि 1980 के दशक में, भारत के कई प्राणी उद्यानों में विदेश के प्राणी उद्यानों से अफ्रीकी चीते लाए गए, लेकिन उनके आहार, पर्यावरण और प्रजनन संबंधी अन्य बाधाओं के कारण उनकी संख्या बढ़ाने में कामयाबी नहीं मिली.
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(The above story first appeared on LatestLY on Sep 19, 2022 08:38 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

