जरुरी जानकारी | ई-रुपये से सीमापार प्रेषण की लागत आधी होकर दो-तीन प्रतिशत हो जाएगी: सचिव
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. वित्त मंत्रालय में आर्थिक मामलों के सचिव अजय सेठ ने शुक्रवार को कहा कि 'केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा' (सीबीडीसी) यानी ई-रुपया सीमापार प्रेषण की लागत को आधा कर दो-तीन प्रतिशत तक ला सकता है।
नयी दिल्ली, आठ दिसंबर वित्त मंत्रालय में आर्थिक मामलों के सचिव अजय सेठ ने शुक्रवार को कहा कि 'केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा' (सीबीडीसी) यानी ई-रुपया सीमापार प्रेषण की लागत को आधा कर दो-तीन प्रतिशत तक ला सकता है।
सेठ ने उद्योग मंडल फिक्की के वार्षिक कार्यक्रम में कहा कि सीबीडीसी का इस्तेमाल व्यापार, प्रेषण या किसी अन्य सीमापार भुगतान के लिए किया जा सकता है।
सेठ ने कहा, "फिलहाल सीमापार से भुगतान की बहुत सक्षम प्रणाली नहीं है, इसमें समय लगता है। साथ ही लागत भी एक घटक है।"
ई-रुपया एक डिजिटल टोकन है जो वैध मुद्रा का प्रतिनिधित्व करता है। इसे कागजी मुद्रा और सिक्कों के समान मूल्य-वर्ग में जारी किया जा रहा है। इसे बैंकों के जरिये वितरित किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि भारत में विदेश से सालाना लगभग 100 अरब डॉलर धनप्रेषण होता है। वैश्विक स्तर पर आठ-नौ प्रतिशत लागत के मुकाबले भारत में प्रत्येक लेनदेन मूल्य के पांच प्रतिशत से भी कम लागत आती है।
सेठ ने कहा, "सीमा पार भुगतान पर आने वाली लागत को दो-तीन प्रतिशत तक लाने में सीबीडीसी बेहद कारगर हो सकता है।"
सीबीडीसी की शुरुआत की घोषणा केंद्रीय बजट 2022-23 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने की थी। आरबीआई ने सीबीडीसी की पायलट थोक परियोजना एक नवंबर, 2022 को शुरू की थी जबकि खुदरा संस्करण पर पायलट परीक्षण एक दिसंबर, 2022 को शुरू किया गया था।
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