देश की खबरें | पोक्सो मामलों में अंतरिम मुआवजे का आदेश देना विशेष अदालत का कर्तव्य : उच्च न्यायालय
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा है कि विशेष अदालत का कर्तव्य है कि वह यौन उत्पीड़न के नाबालिग पीड़ितों को अंतरिम मुआवजे का आदेश दे और यह जिम्मेदारी कानूनी सेवा प्राधिकरण को नहीं सौंपी जा सकती।
नयी दिल्ली, 16 जून दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा है कि विशेष अदालत का कर्तव्य है कि वह यौन उत्पीड़न के नाबालिग पीड़ितों को अंतरिम मुआवजे का आदेश दे और यह जिम्मेदारी कानूनी सेवा प्राधिकरण को नहीं सौंपी जा सकती।
न्यायमूर्ति विभू बाखरू ने कहा कि यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (पोक्सो) अधिनियम के तहत पीड़ितों को मुआवजा देने के लिए कोई विशेष योजना नहीं है और यौन अपराधों के पीड़ितों के लिए राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण की योजना पोक्सो मामलों पर लागू नहीं होती।
उच्च न्यायालय ने कहा कि ऐसी स्थिति में प्राधिकरण योजना को "विशेष अदालत द्वारा पोक्सो अधिनियम के तहत पीड़ितों को मुआवजा देने के लिए" दिशानिर्देश मानने की जरूरत है।
अदलत की यह टिप्पणी दो नाबालिग लड़कियों की मां द्वारा दायर एक याचिका पर आयी है जिसमें अतिरिक्त अंतरिम मुआवजे का अनुरोध किया गया है। इसमें आरोप लगाया गया है कि नाबालिग लड़कियों का पिता उनका शारीरिक शोषण और यौन उत्पीड़न करता था।
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उनकी शिकायत के आधार पर भारतीय दंड संहिता के तहत छेड़छाड़ और पोक्सो कानून की धारा 10 के तहत यौन उत्पीड़न की प्राथमिकी दर्ज की गयी थी। इसमें अधिकतम सात साल जेल की सजा का प्रावधान है वहीं छेड़छाड़ के लिए दो साल की सजा का प्रावधान है।
विशेष अदालत ने सितंबर 2018 में दिल्ली पीड़ित मुआवजा योजना के तहत प्रत्येक नाबालिग लड़की को 50,000 रुपये का अंतरिम मुआवजा दिया था।
बाद में उनकी मां ने अतिरिक्त अंतरिम मुआवजे का अनुरोध किया जिसे विशेष अदालत ने एक जून, 2019 को दिल्ली राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएसएलएसए) को विचारार्थ भेज दिया।
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