देश की खबरें | डीयूएसआईबी संचालित रैन बसेरों में रखरखाव की सुविधा सुनिश्चित करने के लिए व्यवस्था होनी चाहिए : अदालत
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा है कि राष्ट्रीय राजधानी में दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड द्वारा चलाये जा रहे रैन बसेरों में सुविधाएं सुनिश्चित करने के लिए एक व्यवस्था होनी चाहिए । इसके साथ ही अदालत ने इन आश्रय स्थलों के संचालन की निगरानी के लिये गैर सरकारी संगठनों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं को भी शामिल किये जाने का आदेश दिया ।
नयी दिल्ली, 29 मई दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा है कि राष्ट्रीय राजधानी में दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड द्वारा चलाये जा रहे रैन बसेरों में सुविधाएं सुनिश्चित करने के लिए एक व्यवस्था होनी चाहिए । इसके साथ ही अदालत ने इन आश्रय स्थलों के संचालन की निगरानी के लिये गैर सरकारी संगठनों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं को भी शामिल किये जाने का आदेश दिया ।
उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति विपिन सांघी एवं रजनीश भटनागर की पीठ ने यह निर्देश दिया है । अदालत को एम्स के भीतर के एक रैन बसेरे का वीडियो रिकॉर्डिंग दिखाया गया था जिसमें कई कमियां थी । जैसे पीने के पानी तथा साफ सफाई का अभाव था और वहां ठहरने वाले लोगों का कोई रिकार्ड मौजूद नहीं था ।
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अदालत ने 22 मई को इन रैन बसेरों का निरीक्षण करने का निर्देश दिया था। इसके बाद यह वीडियो रिकॉर्डिंग पीठ के समक्ष पेश किया गया । इन रैन बसेरों में 22 लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हुये थे ।
अदलत को यह बताया गया कि 22 मई के आदेश के बाद दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड :डीयूएसआईबी: हरकत में आया और कार्रवाई करते हुये शौचालयों को साफ कराया और सभी शौचालयों को वहां रहने वाले लोगों के लिये उपलब्ध कराया ।
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पीठ ने हालांकि कहा कि ऐसा लगता है कि इसके पिछले आदेश के बाद बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारियों एवं दिल्ली के मुख्य सचिव की ओर से समस्याओं को देखते हुये सुधारात्मक कदम उठाए गए हैं लेकिन इस बात की आशंका है कि जब एक बार अदालत इसकी निगरानी करना बंद कर देती है तो पुरानी स्थिति वापस आ सकती है।
अदालत ने यह भी पाया है कि डीयूएसआईबी ने दावा किया कि यह प्रवेश रजिस्टर रखता है, और कुछ प्रतियां रिकार्ड के तौर पर पेश की गयी हैं, लेकिन 'हम इससे आश्वस्त नहीं हैं कि नियमित तौर पर गंभीरता से इस रजिस्टर को भरा जाता है ।'
इसलिये यह पीठ निर्देश देती है कि वहां एक प्रणाली होना चाहिये जिसके तहत सुविधाओं के प्रबंधन के संबंध में इन रैन बसेरों में और डीयूएसआईबी द्वारा संचालित अन्य आश्रय स्थलों में पर्याप्त जांच और सतर्कता रखी जाए।
उच्च न्यायालय ने कहा कि कई गैर सरकारी संगठन हैं और सामाजिक कार्यकर्ता हैं जो ऐसे रैन बसेरों में केवल मानवता के लिये सामाजिक सेवा की पेशकश कर रहे हैं ।
पीठ ने कहा, 'इसलिये हम डीयूएसआईबी को निर्देश देते हैं कि मान्यता प्राप्त गैर सरकारी संगठनों एवं व्यक्तिगत सामाजिक कार्यकर्ताओं को जो इससे जुड़े हुये हैं उन्हे ऐसे रैन बसेरों के पर्यवेक्षण में शामिल किया जाना चाहिये ।'
अदालत ने इसके साथ ही अन्य निर्देश देते हुये कहा कि सभी प्रक्रिया अगले तीन कार्य दिवसों में शुरू की जाना चाहिये और उसके बाद एक सप्ताह में इसे पूरा कर लिया जाना चाहिये ।
इसके बाद अदालत ने मामले में सुनवाई की अगली तारीख दस जून मुकर्रर कर दी ।
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