जरुरी जानकारी | मांग कमजोर रहने से अधिकांश तेल-तिलहन में गिरावट, मूंगफली, बिनौला स्थिर

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. मांग कमजोर रहने के बीच शुक्रवार को देश के तेल तिलहन बाजार में अधिकांश तेल तिलहन कीमतों में गिरावट दर्ज हुई। वहीं ऊंचे भाव पर कमजोर कारोबार के बीच मूंगफली तेल-तिलहन और स्टॉक नगण्य होने के बीच बिनौला तेल कीमतें पूर्वस्तर पर बंद हुई।

नयी दिल्ली, 14 जून मांग कमजोर रहने के बीच शुक्रवार को देश के तेल तिलहन बाजार में अधिकांश तेल तिलहन कीमतों में गिरावट दर्ज हुई। वहीं ऊंचे भाव पर कमजोर कारोबार के बीच मूंगफली तेल-तिलहन और स्टॉक नगण्य होने के बीच बिनौला तेल कीमतें पूर्वस्तर पर बंद हुई।

शिकॉगो एक्सचेंज में मामूली घट बढ़ जारी है जबकि मलेशिया एक्सचेंज में मामूली सुधार था।

बाजार सूत्रों ने कहा कि जिम्मेदार लोगों को पहले यह तय करना चहिये कि तेल-तिलहन के मामले में क्या रुख अपनाया जाना चाहिये। यह तय करना होगा कि अपना उत्पादन बढ़ाकर आत्मनिर्भर बनना है या आयात पर निर्भरता बढ़ाते जाना है।

उन्होंने कहा कि सस्ता आयात देशी तेल तिलहन के बाजार को ठेस पहुंचाता है क्योंकि किसानों को अपनी लागत वसूल करने में भी कठिनाई आने लगती है। देशी तेल तिलहनों का बाजार विकसित किये बगैर इस संकल्प को पूरा नहीं किया जा सकता। इसलिए देशी तेल तिलहनों का बाजार बनाना हम सबकी पहली प्राथमिकता होनी चाहिये।

सूत्रों के मुताबिक, खाद्यतेलों के दाम उस कदर नहीं बढ़े हैं जितना दूध, खल, डीओसी जैसी अन्य वस्तुओं के दाम बढ़े हैं। खाद्यतेलों के दाम बढ़ने के व्यवहारिक कारणों को राशन की दुकानों के जरिये वितरण से, अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) को युक्तिसंगत बनाने जैसे उपायों से नियंत्रित किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि आयातित खाद्यतेलों पर शुल्क लगाकर देशी खाद्यतेलों के बाजार को मजबूत किया जा सकता है। किसानों को लाभकारी मूल्य मिलने पर वह स्वयं ही तिलहन का उत्पादन बढ़ा देंगे। इससे देशी तेल पेराई मिलें चलेंगी, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, आयात पर खर्च होने वाली विदेशीमुद्रा की बचत होगी। डीओसी और खल की उपलब्धता बढ़ेगी और इसके आयात के लिए अलग से विदेशीमुद्रा खर्च नहीं करनी होगी।

उन्होंने कहा कि सरकार को डीओसी के निर्यात के लिए सब्सिडी देनी चाहिये जिससे निर्यात बढ़ेगा, स्थानीय स्तर पर डीओसी सस्ता मिलेगा और खाद्यतेल भी सस्ता होगा। इसके अलावा आयात शुल्क के जरिये राजस्व की भी प्राप्ति होगी।

तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:

सरसों तिलहन - 5,990-6,050 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली - 6,125-6,400 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) - 14,650 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली रिफाइंड तेल 2,220-2,520 रुपये प्रति टिन।

सरसों तेल दादरी- 11,500 रुपये प्रति क्विंटल।

सरसों पक्की घानी- 1,870-1,970 रुपये प्रति टिन।

सरसों कच्ची घानी- 1,870-1,995 रुपये प्रति टिन।

तिल तेल मिल डिलिवरी - 18,900-21,000 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 10,425 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 10,225 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 8,850 रुपये प्रति क्विंटल।

सीपीओ एक्स-कांडला- 8,775 रुपये प्रति क्विंटल।

बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 10,225 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 9,925 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन एक्स- कांडला- 8,925 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।

सोयाबीन दाना - 4,710-4,730 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन लूज- 4,510-4,630 रुपये प्रति क्विंटल।

मक्का खल (सरिस्का)- 4,075 रुपये प्रति क्विंटल।

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