देश की खबरें | खाद्य पदार्थों की पैकेजिंग के लिए अखबार का न करें इस्तेमाल : खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग

रायपुर, 20 जून छत्तीसगढ़ के खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने लोगों और व्यापारियों से खाद्य पदार्थ की पैकेजिंग के लिए अखबार का इस्तेमाल नहीं करने का अनुरोध किया है।

विभाग ने कहा कि है कि बार-बार समझाने के बाद भी कोई खाद्य कारोबारी न माने तो उसकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग में शिकायत करें।

राज्य के जनसंपर्क विभाग के अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि राज्य शासन के खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने खाद्य पदार्थों की पैकेजिंग के लिए अखबार का इस्तेमाल नहीं करने की अपील की है।

उन्होंने बताया कि अखबार की छपाई में उपयोग होने वाली स्याही में कई खतरनाक रसायनों एवं रंजकों की मौजूदगी को ध्यान में रखते हुए विभाग ने खाद्य कारोबारियों और लोगों से आग्रह किया है कि वे खाद्य पदार्थ की पैकेजिंग के लिए छपे हुए कागजों का उपयोग न करें। यह मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।

अधिकारियों ने बताया कि विभाग ने कहा है कि बार-बार समझाने के बाद भी यदि कोई खाद्य कारोबारी इसका पालन नहीं करता है तो खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग में इसकी शिकायत की जा सकती है।

खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि समाचार पत्र दैनिक जीवन में सूचना के महत्वपूर्ण स्त्रोत हैं। न्यूनतम लागत होने के कारण खाद्य पदार्थों को लाने-ले जाने के लिए अक्सर छपाई के लिए उपयोग किए जाने वाले अखबारी कागज/पेपर का उपयोग किया जाता है। खाद्य पदार्थ लाने के लिए आमतौर पर खाद्य पदार्थों को अखबार में लपेटा जाता है जिसका इस्तेमाल ज्यादातर दुकानों में किया जाता है।

अधिकारियों ने कहा कि विक्रेता भोजन पैक करने के लिए और आम लोग घर पर भी गहरे तले हुए भोजन से अतिरिक्त तेल निकालने के लिये अक्सर अखबारी कागज/पेपर का उपयोग करते हैं। जो सेहत की दृष्टि से बहुत हानिकारक है।

उन्होंने बताया कि अखबार का उपयोग किए जाने से भोजन में स्याही का स्थानांतरण होता है जो भोजन की गुणवत्ता और सुरक्षा को प्रभावित करता है। यह मानव स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक है।

अधिकारियों ने बताया कि अखबार की छपाई में प्रयुक्त स्याही में डाई आइसोब्यूटाइल फटालेड, डाइएन आइसोब्यूटाइलेट जैसे हानिकारक रसायन और कई तरह के हानिकारक रंजक होते हैं, जो तेल के साथ मिल जाते हैं और खाने के जरिए हमारे शरीर में प्रवेश कर जाते हैं।

उन्होंने कहा कि इससे हमारे शरीर में पाचन संबंधी विकार, टॉक्सिसिटी, विभिन्न तरह के कैंसर, महत्वपूर्ण अंगों की विफलता तथा प्रतिरक्षा तंत्र का कमजोर होना जैसी कई बीमारियां होने की आशंका रहती है।

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