ताजा खबरें | द्रमुक सदस्य ने केंद्र पर दक्षिण के राज्यों के साथ सौतेला व्यवहार का आरोप लगाया

नयी दिल्ली, 18 मार्च द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) ने मंगलवार को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार पर दक्षिणी राज्यों के साथ सौतेला व्यवहार करने और सार्वजनिक स्वास्थ्य मानकों पर अच्छा प्रदर्शन करने के लिए दंडित करने का आरोप लगाया।

उच्च सदन में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के कामकाज पर चर्चा की शुरुआत करते हुए द्रमुक के तिरुचि शिवा ने कहा कि परिसीमन का दक्षिणी राज्यों पर बहुत बुरा असर होगा, जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रित कर ली है जबकि उत्तरी राज्यों में यह बढ़ गयी है।

उन्होंने केंद्रीय बजट में स्वास्थ्य पर आवंटन कम करने और दवाओं पर शोध के लिए मामूली राशि निर्धारित करने के लिए केंद्र की आलोचना की।

उन्होंने कहा, ‘‘दक्षिणी राज्य हमेशा पहले नंबर पर होते हैं, इसलिए हमें पीड़ित किया जाता है। इसलिए हमें दंडित किया जाता है। किसी भी चीज में हमारा ध्यान नहीं रखा जाता है। जिस तरह से हम अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं, उसके लिए हमें नजरअंदाज किया जा रहा है। हमने कभी नहीं सुना कि एक मेधावी छात्र को कहीं भी दंडित किया जाता है, लेकिन केवल हमारे देश में ऐसा हो रहा है।’’

उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र दक्षिणी राज्यों के साथ सौतेला रवैया अपना रहा है और उन्हें पक्षपातपूर्ण तरीके से देख रहा है।

शिवा ने मजबूत सार्वजनिक स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे, निवारक देखभाल और सामुदायिक स्वास्थ्य सेवाओं पर मजबूत ध्यान देने के अलावा माध्यमिक और तृतीयक अस्पतालों द्वारा सर्वोत्तम सेवाएं प्रदान करने का हवाला देते हुए बताया कि दक्षिण के राज्यों ने सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों में सुधार के लिए कैसे ध्यान केंद्रित किया है।

उन्होंने कहा, ‘‘केंद्र सरकार को उन राज्यों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए जहां चीजें खराब हो रही हैं। केंद्र सरकार उन राज्यों पर ध्यान केंद्रित नहीं कर रही है जो अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रहे हैं, बल्कि वे हमें दंडित करने की कोशिश कर रहे हैं।’’

शिवा ने यह भी कहा कि अगर जनसंख्या के आधार पर परिसीमन किया जाता है तो दक्षिणी राज्यों को नुकसान होगा।

उन्होंने कहा, ‘‘दक्षिणी राज्यों ने जनसंख्या को नियंत्रित किया है, जबकि उत्तरी राज्यों में यह बढ़ गया है।’’

उन्होंने कहा कि सरकार को समान जनसंख्या नियंत्रण पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए था और परिवार नियोजन को लागू किया जाना चाहिए था।

उन्होंने याद किया कि 1976 में संविधान में एक संशोधन लाया गया था कि जनसंख्या नियंत्रण को पूरे देश में समान रूप से लागू किया जाएगा और उसके बाद ही परिसीमन किया जा सकता है और इसे 25 साल के लिए टाल दिया गया था।

शिवा ने कहा कि यहां तक कि 2001 में जब दिवंगत अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री थे, तब भी उन्होंने इसे 25 साल के लिए टाल दिया था क्योंकि आबादी उस स्तर पर नहीं पहुंची थी।

उन्होंने अफसोस जताया कि जनसंख्या नियंत्रण पर ध्यान देने की बजाय केंद्र ने चिकित्सकीय शिक्षा में दाखिले के लिए राज्यों पर नीट परीक्षा थोपने पर ध्यान केंद्रित किया है।

शिवा ने कहा, ‘‘जनसंख्या को नियंत्रित करने और परिवार नियंत्रण पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय आप नीट परीक्षा पर जोर दे रहे हैं और अन्य सभी राज्यों को नीट परीक्षा स्वीकार करने के लिए बाध्य कर रहे हैं। इसने छात्रों को बहुत परेशान किया है।’’

द्रमुक सदस्य ने स्वास्थ्य पर बजट आवंटन को 2017-18 में 2.5 प्रतिशत से घटाकर इस साल के बजट में केवल 1.9 प्रतिशत करने के लिए केंद्र की आलोचना की और कहा कि देश में गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों की संख्या को देखते हुए सरकार को स्वास्थ्य के लिए अधिक धन आवंटित करना चाहिए था।

ब्रजेन्द्र

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