लखनऊ, 11 अगस्त उत्तर प्रदेश विधानसभा के मॉनसून सत्र के पांचवें दिन शुक्रवार को बेरोजगारों को नौकरी देने के प्रश्न पर सरकार के उत्तर से असंतुष्ट होकर समाजवादी पार्टी (सपा) के सदस्यों ने सदन से बहिर्गमन किया।
विधानसभा में सपा सदस्यों ने प्रश्नकाल के दौरान यह पूछा था कि क्या श्रम एवं सेवायोजन मंत्री बताने की कृपा करेंगे कि श्रम विभाग द्वारा वर्तमान में कौन सी प्रमुख योजनाएं प्रचलित हैं। क्या सरकार उक्त का विवरण सदन के पटल पर रखते हुए बतायेगी कि प्रदेश में कुल शिक्षित बेरोजगारों (इंटर, बी.ए., एम.ए, डिप्लोमा, बी.टेक, एम.टेक, पी.एच.डी.) की संख्या कितनी है तथा विगत दो वर्षों में श्रम विभाग द्वारा कितने लोगों को नौकरी दिलाई गई है? यदि नहीं, तो क्यों?
श्रम एवं सेवायोजन मंत्री अनिल राजभर ने बताया कि सेवायोजन विभाग के अधीन संचालित प्रदेश के सेवायोजन कार्यालयों द्वारा रोजगार के इच्छुक अभ्यर्थियों(जॉब सीकर्स) को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने का कार्य किया जाता है।
सेवायोजन विभाग के वेब पोर्टल पर रोजगार के इच्छुक अभ्यर्थियों(जॉब सीकर्स) एवं सेवायोजकों को ऑनलाइन पंजीकरण करने की व्यवस्था विकसित है।
समाजवादी पार्टी के सदस्य डॉक्टर संग्राम यादव ने कहा कि हम नौकरी का मामला उठाते और मंत्री जी रोजगार की बात करते हैं। उन्होंने आउटसोर्सिंग पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार सामंती व्यवस्था लाने का कार्य कर रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पिछड़ा और दलित विरोधी है। यादव के आरोप पर मंत्री ने पलटवार करते हुए पूर्ववर्ती समाजवादी पार्टी सरकार पर निशाना साधा और योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व की सरकार की उपलब्धियां बताते हुए रोजगार मेलों की चर्चा शुरू की।
राजभर के जवाब से असंतुष्ट होकर सपा सदस्यों ने सरकार विरोधी नारे लगाते हुए सदन से बहिर्गमन किया। दो मिनट बाद फिर वापस लौट आये।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)












QuickLY