नयी दिल्ली, 29 मार्च केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री अर्जुन मुंडा ने मंगलवार को झारखंड राज्य से संबंधित एक संविधान संशोधन विधेयक राज्यसभा में चर्चा के लिए किया। इसमें झारखंड में भोगता समुदाय को अनुसूचित जातियों की सूची से हटाने और कुछ समुदायों को अनुसूचित जनजातियों की सूची में शामिल करने का प्रस्ताव किया गया है।
मुंडा ने ‘संविधान (अनुसूचित जातियां और अनुसूचित जनजातियां) आदेश (संशोधन) विधेयक, 2022’ पेश करते हुए इसे सर्वसम्मति से पारित करने का अनुरोध किया।
चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस के नारण भाई राठवा ने विधेयक का स्वागत किया और कहा कि यह मांग झारखंड राज्य सरकर की ओर से बार-बार की गई लेकिन इसमें देरी हुई।
उन्होंने कहा कि इस विधेयक को भाजपा की सरकार ने 2016 में ही मंजूरी दे दी थी और चर्चा के लिए इसे लोकसभा में भी पेश किया गया था लेकिन चर्चा नहीं हो सकी।
उन्होंने कहा कि भाजपा की सरकार सात साल से इस मांग को अनुसुना करने के बाद यह विधेयक अब लेकर आई है।
राठवा ने कहा, ‘‘इससे साबित होता है कि दलितों और आदिवासियों की आपको कितनी चिंता है।’’
उन्होंने कहा कि ऐसी कई जातियां हैं, जिन्हें इस विधेयक में शामिल किए जाने की मांग उठती रही है। उन्होंने कहा कि सरकार को उन सभी जातियों को शामिल करना चाहिए ताकि वह आरक्षण के लाभ से वंचित ना हों।
विधेयक पर चर्चा अधूरी रही
ब्रजेन्द्र
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