नयी दिल्ली, 17 जुलाई भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के महानिदेशक एस एस देसवाल ने शुक्रवार को देहरादून में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से मुलाकात की और सीमा अवसंरचना विकास से संबंधित मुद्दों पर चर्चा की।
अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
आईटीबीपी के पास चीन से लगती 3,488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) की रक्षा का जिम्मा है। इस रेखा का लगभग 350 किलोमीटर लंबा हिस्सा उत्तराखंड से लगता हुआ है।
यह बैठक ऐसे समय हुई है जब भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में कई स्थानों पर पांच मई से गतिरोध चला आ रहा है।
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हालांकि सैन्य और कूटनीतिक स्तर की सिलसिलेवार बैठकों के बाद दोनों पक्षों ने छह जुलाई को विवाद वाले स्थानों से सैनिकों को पीछे हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी।
आईटीबीपी ने पर्वतीय राज्य में सीमा की रक्षा और आपदा राहत अभियानों के लिए अपनी 10 बटालियन तैनात कर रखी हैं जिनमें 10 हजार से ज्यादा कर्मी हैं।
बल के मुखिया उत्तराखंड के दो दिन के दौरे पर हैं। इस दौरान वह मसूरी स्थित आईटीबीपी एकेडमी भी जाएंगे।
बैठक के संबंध में एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस दौरान देसवाल ने मुख्यमंत्री को लंबित प्रस्तावों तथा सीमावर्ती क्षेत्रों तक सड़कों के विकास में हुई प्रगति और आईटीबीपी की चौकियों तथा राज्य के दूरदराज के क्षेत्रों में विद्युत लाइन बिछाने के कार्य के बारे में अवगत कराया।
अधिकारी ने कहा कि आईटीबीपी की आवासीय परियोजनाओं के लिए नयी भूमि और बल की चौकियों वाले दूरदराज के क्षेत्रों में मोबाइल कनेक्टिवटी को मजबूत करने के मुद्दे पर भी इस बैठक में चर्चा हुई।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री और महानिदेशक ने राज्य में जल क्रीड़ा सहित पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए उठाए जा सकने वाले कदमों तथा कोविड-19 लॉकडाउन के चलते राज्य लौटे प्रवासियों की सेवा लेने के मुद्दे पर भी चर्चा की।
अधिकारियों ने कहा कि मुख्यमंत्री ने आईटीबीपी मुखिया को आश्वासन दिया कि राज्य सरकार सीमा से जुड़े कार्यों में तेजी लाने के लिए आईटीबीपी के साथ मिलकर काम करेगी।
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