जरुरी जानकारी | फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट मामले में डीजीजीआई ने दो और लोगों को गिरफ्तार किया

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. फर्जी तरीके से इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) लाभ लेने के मामले में बढ़ते जा रहे हैं। ऐसे मामलों में कार्रवाई करने वाले जीएसटी आसूचना महानिदेशालय (डीजीजीआई) ने बृहस्पतिवार को शेयर बाजार में सूचीबद्ध कंपनी सूनील हाइटेक इंजीनियरिंग के निदेशक रत्नाकर गुट्टे को गिरफतार किया। गुट्टे पर फर्जी तरीके से 520 करोड़ रुपये का आईटीसी लाभ लेने का आरोप है।

मुंबई, 12 नवंबर फर्जी तरीके से इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) लाभ लेने के मामले में बढ़ते जा रहे हैं। ऐसे मामलों में कार्रवाई करने वाले जीएसटी आसूचना महानिदेशालय (डीजीजीआई) ने बृहस्पतिवार को शेयर बाजार में सूचीबद्ध कंपनी सूनील हाइटेक इंजीनियरिंग के निदेशक रत्नाकर गुट्टे को गिरफतार किया। गुट्टे पर फर्जी तरीके से 520 करोड़ रुपये का आईटीसी लाभ लेने का आरोप है।

डीजीजीआई ने इसके साथ ही एक बड़ी साठगांठ का खुलासा करने का दावा करते हुये कहा कि सुनील हाइटेक इंजीनियर्स ने 3,000 करोड़ रुपये मूल्य के फर्जी बिल जारी किये और प्राप्त किये और कंपनी 520 करोड़ रुपये के आईटीसी लाभ में संलिप्त रही है।

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दो दिन पहले ही डीजीजीआई ने तीन अलग अलग मामलों में निजी कंपनियों के चार शीर्ष अधिकारियों को गिरफ्तार किया। इन पर भी फर्जी बिलों के लेनदेन के जरिये 408 करोड़ रुपये का आईटीसी लाभ उठाने का आरोप है।

सुनील हाइटेक के मामले में डीजीजीआई ने कहा है कि जांच के दौरान यह बात सामने आई है कि इस कंपनी के फर्जी बिलों का जाल नयी दिल्ली, हैदराबाद, लुधियाणा, गुरुग्राम, मेरठ, अहमदाबाद और कोलकाता तक फैला हुआ है। कंपनी को पूरे देश में फर्जी तरीके से इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ उठाने के मामले में साठगांठ की सूत्रधार बताया गया है।

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वहीं सुनील हाइटेक द्वारा शेयर बाजारों को भेजे गये जून 2019 के एक नोटिस के मुताबिक राष्ट्रय कंपनी विधि न्यायाधिकरण, मुंबई ने उसके परिसमापन का आदेश जारी किया है और अविल जेरोमे मेनेजेज को कंपनी का परिसमापक नियुक्त किया है।

इस बीच डीजीजीआई ने कहा कि उसकी मुंबई क्षेत्र इकाई ने इसी तरह की एक कार्रवाई के तहत श्री ओसिया फेरो एलाय के निदेशक विजेंद्र विजयराज रांका को गिरफ्तार किया है। कंपनी पर भी फर्जी लेनदेन का आरोप है और यह पता चला है कि माल की वास्तविक आपूर्ति अथवा प्राप्ति किये बिना ही 1,371 करोड़ रुपये के बिलों का आदन प्रदान किया गया जिसमें 209 करोड़ रुपये का आईटीसी लाभ शामिल है।

गुट्टे और रांका दोनों को स्थानीय अदालत में पेश किया गया जिसने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

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