जरुरी जानकारी | डीजीसीए को एक साल में घरेलू एयरलाइन कंपनियों के 23 ऑडिट में 263 खामियां मिलीं

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मुंबई, 30 जुलाई नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने बुधवार को कहा कि पिछले एक साल में आठ घरेलू एयरलाइन कंपनियों के 23 ऑडिट (लेखा परीक्षण) के दौरान उसे 263 खामियां मिली हैं। इनमें से कुछ ऐसी खामियां हैं जिनमें तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई की जरूरत है।

हालांकि, विमानन नियामक ने कहा कि एयर इंडिया के ऑडिट के दौरान सामने आई खामियों की पृष्ठभूमि में, व्यापक परिचालन वाली एयरलाइंस के लिए ऑडिट निष्कर्षों या खामियों की अधिक संख्या ‘पूरी तरह से सामान्य’ है।

आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक साल में टाटा समूह के स्वामित्व वाली एयर इंडिया (साथ ही अब विलय हो चुकी विस्तारा) और एयर इंडिया एक्सप्रेस के साथ कुल 93 ऑडिट निष्कर्ष सामने आए हैं।

इन निष्कर्षों में 19 स्तर-1 उल्लंघन शामिल थे जिन्हें गंभीर सुरक्षा जोखिम माना जाता है और जिनके लिए हवाई संचालक द्वारा तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई की आवश्यकता होती है।

मंगलवार को सूत्रों ने बताया था कि डीजीसीए को एयर इंडिया के प्रशिक्षण, चालक दल के आराम और ड्यूटी अवधि के मानदंडों, और हवाई क्षेत्र योग्यता आदि से संबंधित लगभग 100 उल्लंघनों और टिप्पणियों का पता चला है। नियामक ने एयर इंडिया के 51 ऑडिट निष्कर्षों में इन उल्लंघनों का उल्लेख किया था।

डीजीसीए ने बयान में कहा कि वह परिचालन की सुरक्षा बढ़ाने और अनुपालन सुनिश्चित करने तथा एयरलाइन परिचालन के सभी पहलुओं में निरंतर सुधार के लिए ऑडिट करता है।

बयान के अनुसार, “इस बात पर जोर दिया जाना चाहिए कि व्यापक परिचालन और बड़े आकार के बेड़े वाली एयरलाइन कंपनियों के लिए, ऑडिट निष्कर्षों की अधिक संख्या पूरी तरह से सामान्य है।”

इसमें कहा गया, “उनकी गतिविधियों की मात्रा और पैमाने का अर्थ है कि ऐसे अवलोकन किसी असामान्य चूक के बजाय उनके संचालन की व्यापकता और गहराई को दर्शाते हैं।”

आंकड़ों से पता चला कि पिछले एक वर्ष में इंडिगो के साथ 23, स्पाइसजेट के साथ 14, अलायंस एयर के साथ 57, क्विक जेट के साथ 35, घोडावत स्टार के साथ 41 और पूर्ववर्ती विस्तारा के साथ 17 ऑडिट निष्कर्ष सामने आए।

जिन निष्कर्षों को गंभीर जोखिम माना जाता है और जिनके लिए तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई की आवश्यकता होती है, उन्हें स्तर-1 के रूप में वर्गीकृत किया जाता है, जबकि स्तर-2 की चूक में गैर-अनुपालन शामिल है।

वैश्विक स्तर पर, विमानन नियामकों को प्रमुख एयरलाइन कंपनियों के साथ उनके उपक्रमों की विविधता और गहनता के कारण नियमित रूप से इसी तरह के स्थिति का सामना करना पड़ता है।

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