नयी दिल्ली, 17 मार्च सरकार ने सोमवार को राज्यसभा में कहा कि विमानन नियामक डीजीसीए ने एयरलाइनों को सलाह दी है कि वे उड़ानों के दौरान नियमित रूप से सीटों का निरीक्षण करें और एअर इंडिया ने हर सात दिन में सीट ‘कुशन’ की ढीली स्थिति की जांच के लिए निरीक्षण कार्यक्रम शुरू किया है।
नागर विमानन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने एक सवाल के लिखित जवाब में राज्यसभा को यह जानकारी दी।
पिछले महीने, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उन्हें टूटी सीट आवंटित करने के लिए एअर इंडिया की आलोचना की थी। विमानन कंपनी ने इस घटना के लिए माफ़ी मांगी थी, जबकि नागर विमानन मंत्री के राममोहन नायडू ने एयरलाइन को आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया था।
मोहोल ने कहा कि सीटों और अन्य केबिन उपकरणों के नियमित निरीक्षण की ज़िम्मेदारी विमान कंपनियों की है। उन्होंने कहा कि जब भी उड़ान के दौरान कोई खराबी देखी जाती है, तो चालक दल के सदस्य रजिस्टर में इसकी प्रविष्टि करते हैं।
मोहोल ने कहा कि नागरिक विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने एयरलाइन कंपनियों को विमान के संचालन के दौरान सीटों का नियमित निरीक्षण करने की सलाह दी है।
उन्होंने एक अन्य सवाल के जवाब में कहा कि छह छोटे हवाई अड्डों सहित 11 हवाई अड्डों की पहचान सार्वजनिक-निजी भागीदारी के तहत संचालन के लिए की गई है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन (एनएमपी) के अनुसार भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) द्वारा संचालित 25 हवाई अड्डों को 2022 से 2025 की अवधि के लिए पट्टे पर देने के लिए चिह्नित किया गया है।
इन हवाई अड्डों में भुवनेश्वर, वाराणसी, अमृतसर, त्रिची, इंदौर, रायपुर, कालीकट, कोयंबटूर, नागपुर, पटना, मदुरै, सूरत, रांची, जोधपुर, चेन्नई, विजयवाड़ा, वडोदरा, भोपाल, तिरुपति, हुबली, इंफाल, अगरतला, उदयपुर, देहरादून और राजमुंदरी शामिल हैं।
मोहोल ने कहा कि छह छोटे हवाई अड्डों के साथ अमृतसर, वाराणसी, भुवनेश्वर, रायपुर और त्रिची जैसे चुनिंदा पांच हवाई अड्डों की पहचान सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) के तहत संचालन, प्रबंधन और विकास के लिए की गई है।
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