नयी दिल्ली, 15 नवंबर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) में विकासशील अर्थव्यवस्थाओं का कोटा बढ़ाने का फैसला वैश्विक वित्तीय स्थिरता की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी अनंत नागेश्वरन ने बुधवार को यह बात कही।
उन्होंने कहा कि बहुपक्षीय ऋण एजेंसी के स्थायी संसाधनों को बढ़ाना होगा।
वित्त मंत्रालय के एक कार्यक्रम में नागेश्वरन ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों में सुधारों को विश्व बैंक और बहुपक्षीय विकास बैंकों (एमडीबी) से आगे जाना होगा।
उन्होंने कहा, ‘‘आईएमएफ के कार्यकारी बोर्ड ने प्रशासनिक बोर्ड को प्रस्ताव दिया है कि सदस्यों को उनके मौजूदा कोटा के अनुपात में 50 प्रतिशत कोटा आवंटित करना चाहिए।’’
कोटा की 16वीं सामान्य समीक्षा (जीआरक्यू) से अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष में विकासशील अर्थव्यवस्थाओं को अधिक हिस्सेदारी मिलने की संभावना है।
उन्होंने कहा, ‘‘यह कोटा वृद्धि आईएमएफ के स्थायी संसाधनों को बढ़ाकर और उधारी संसाधनों पर निर्भरता को कम करके वैश्विक वित्तीय स्थिरता की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।’’
नागेश्वरन ने यह भी बताया कि इस साल दिल्ली में जी20 शिखर सम्मेलन के दौरान वैश्विक नेता कोटा बढ़ाने पर विचार करने और आईएमएफ में सुधार प्रक्रिया को जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध रहे।
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