शांति समझौते के बावजूद अमेरिका और ईरान फिर आमने-सामने
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

26 जून को मालवाहक जहाज पर ईरान के हमले के बाद अमेरिका ने भी ईरान पर जवाबी कार्रवाई की है. इससे दोनों देशों के बीच चल हे शांति समझौते पर सवाल खड़े हो गए हैं. खासकर होर्मुज को लेकर दोनों देशों पर सहमति बनती नहीं दिख रही.अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते के एक हफ्ते के अंदर ही दोनों देश फिर से एक दूसरे के आमने सामने आ गए हैं. अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड ने जानकारी दी कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य में एक मालवाहक जहाज पर 25 जून को हुए ड्रोन हमले के जवाब में ईरान पर हमला किया. अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक उन्होंने ईरान में मिसाइल और ड्रोन ठिकानों और तटीय इलाकों में स्थित रडारों को निशाना बनाया. 28 फरवरी से चल रहे युद्ध को खत्म करने और होर्मुज को फिर से खोलने के लिए दोनों देशों शांति समझौते पर दस्तखत कर चुके हैं.

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के ड्रोन हमले ने युद्धविराम का उल्लंघन किया है. इस हमले से पहले ट्रंप ने मीडिया से कहा था, "आपको पता चल जाएगा कि क्या अमेरिका इसका जवाब देगा." उन्होंने यह भी कहा था, "मुझे यह बात पसंद नहीं आई कि उन्होंने कल एक हमला किया, असल में चार हमले किए." जब पूछा गया कि जब वे इस बात पर जोर दे रहे हैं कि तेहरान के साथ बातचीत अच्छी चल रही है, तो फिर हमले क्यों होंगे, इस पर ट्रंप ने ईरान के बारे में कहा कि "वे थोड़े अलग हैं."

मालवाहक जहाज पर ईरान की तरफ से हमला उस समय हुआ जब संयुक्त राष्ट्र की एक समुद्री एजेंसी ने इस सप्ताह फंसे हुए जहाजों को जलडमरूमध्य से बाहर निकालने के लिए एक वैकल्पिक रास्ते का इस्तेमाल करते हुए अभियान शुरू किया था. इस अभियान में जलडमरूमध्य के बीच वाले रास्ते से गुजरने के बजाय ओमान के तटों से लगता रास्ता चुना गया था.

ईरानी संसद के राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग के प्रमुख इब्राहिम अजीजी ने सोशल मीडिया पर ट्रंप को जवाब देते हुए कहा, "होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का नियंत्रण है, इसलिए नियमों का सम्मान करें और नियंत्रण को तनाव समझने की भूल ना करें." उन्होंने यह भी लिखा कि यह युद्धविराम का उल्लंघन नहीं है बल्कि यह युद्धविराम का प्रबंधन है.

वहीं,अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस ने सोशल मीडिया पर कहा कि अगर युद्धविराम समझौते को लेकर कोई असहमति है तो ईरान को फोन उठाना चाहिए. साथ ही उन्होंने कहा कि हिंसा का जवाब हिंसा से दिया जाएगा.

होर्मुज पर असहमत अमेरिका और ईरान

समाचार एजेंसी असोसिएटेड प्रेस से बातचीत में एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि ईरान पर अमेरिका ने करीब एक घंटे तक हमले जारी रखे. ताजा हमले अमेरिका और ईरान के लिए एक नाजुक समय में हुए हैं क्योंकि दोनों देश युद्ध को स्थायी रूप से खत्म करने के लिए बातचीत कर रहे हैं. ईरान ने पिछले हफ्ते अमेरिका के साथ हुए मौजूदा अंतरिम समझौते के बावजूद, होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपने नियंत्रण को लेकर क्षेत्र और अमेरिका को चुनौती दी है.

अमेरिका और ईरान अभी भी समझौते की शर्तों पर बातचीत कर रहे हैं, जिसमें सबसे अहम होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों को निकालने और ईरान के यूरेनियम के भंडार के भविष्य से जुड़े मुद्दे शामिल हैं. अंतरिम समझौते के तहत, दोनों देशों के पास इस समझौते के ब्यौरे पर फैसले लेने के लिए 60 दिन का समय है.

रुका फंसे जहाजों को निकालने का अभियान

अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन ने ईरान के हमले के बाद जहाजों को निकालने का काम रोक दिया है. साथ ही कहा है कि जब तक यह गारंटी नहीं मिलती कि दूसरे जहाजों पर हमला नहीं होगा, तब तक इस अभियान को फिर से शुरू नहीं किया जाएगा. एजेंसी के महासचिव आर्सेनियो डोमिंगेज ने कहा कि हाल के दिनों में लगभग 115 जहाज जलडमरूमध्य से बाहर निकलने में सफल रहे, और लगभग 500 जहाज अभी भी इस इलाके में फंसे हुए हैं.

शिपिंग एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ड्रोन हमले ने उस उम्मीद पर पानी फेर दिया जो फंसे हुए जहाजों के खाड़ी से बाहर निकलने और कच्चे तेल ले जाने वाले टैंकरों की बढ़ती आवाजाही के तौर पर नजर आ रही थी. समुद्री डेटा कंपनी विंडवार्ड ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर कहा, "होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते व्यापारिक विश्वास को अपनी पहली महत्वपूर्ण परीक्षा का सामना करना पड़ा है."

समुद्री डेटा पर काम करने वाली कंपनी लॉयड्स लिस्ट इंटेलिजेंस के अनुसार, ईरान के इस बात पर जोर देने के बाद कि होर्मुज से गुजरने वाले जहाज केवल तेहरान के स्वीकृत मार्गों का इस्तेमाल करें, ओमान के पास संयुक्त राष्ट्र समर्थित मार्ग पर जलडमरूमध्य पार करने की कोशिश कर रहे कम से कम दो टैंकरों ने अपना रास्ता बदल लिया. लॉयड ने हालांकि यह भी जानकारी दी है कि हमले के बाद भी दो दर्जन से अधिक जहाज जलडमरूमध्य के दक्षिणी मार्ग से गुजर रहे थे.