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बिहार में एके-47 से प्रदर्शनकारियों पर फायरिंग की घटना पर सियासी घमासान

बिहार की राजधानी पटना में नीट-परीक्षा में अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रही भीड़ पर एके-47 से फायरिंग को लेकर गंभीर बहस छिड़ गई है.

बिहार में एके-47 से प्रदर्शनकारियों पर फायरिंग की घटना पर सियासी घमासान
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

बिहार की राजधानी पटना में नीट-परीक्षा में अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रही भीड़ पर एके-47 से फायरिंग को लेकर गंभीर बहस छिड़ गई है.विभिन्न छात्र संगठनों द्वारा पेपर लीक, दिल्ली में प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर 25 जुलाई को बिहार बंद का आयोजन किया गया था. इस दौरान राज्यभर में छात्रों ने जमकर हंगामा किया. जगह-जगह पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हुईं. इन प्रदर्शनों के कई वीडियो और फोटो वायरल हुए. इन्हीं वीडियो में एक सीवान शहर का था, जिसमें एक जवान को प्रदर्शन कर रहे लोगों पर एके-47 से फायरिंग करते हुए देखा गया. यहां पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच जमकर पथराव हुआ. स्थिति गंभीर होती देख पुलिस ने पहले आंसू गैस के गोले छोड़े, फिर लाठीचार्ज किया. इस बीच एसपी पूरन झा के बॉडीगार्ड अभिषेक पटेल ने फायरिंग की.

पुलिस मुख्यालय के अनुसार छात्र संगठनों के प्रदर्शन के दौरान राज्यभर में 694 लोगों को हिरासत में लिया गया. इनमें 339 नाबालिग थे, जिन्हें बाद में छोड़ दिया गया. वहीं, हिंसक घटनाओं में संलिप्त पाए गए 355 लोगों को न्यायालय में पेश किया गया. केवल पटना से ही 75 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया. पंद्रह जिलों में 164 अधिकारी-कर्मचारी जख्मी हुए तथा 14 सरकारी वाहनों में तोड़फोड़ की गई, जबकि एक वाहन को जला दिया गया. 13 प्रदर्शनकारी भी प्रदर्शन के दौरान घायल हुए.

इसी दौरान लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे व पूर्व मंत्री तथा जनशक्ति जनता दल (जेजेडी) के प्रमुख तेज प्रताप यादव को भी गिरफ्तार कर 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में बेउर सेंट्रल जेल भेज दिया गया. तेज प्रताप यादव ने कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके से बिहार आने का आग्रह करते हुए राज्य में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार के खिलाफ आंदोलन का आह्वान किया था. पालीगंज (पटना) के माले विधायक संदीप सौरभ, आइसा के राज्य अध्यक्ष धनंजय, उपाध्यक्ष सबा आफरीन समेत कई युवा नेता जेल भेजे गए.

एके-47 से भीड़ पर निशाना लगाने का आरोप

बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कहा, "बिहार में किसके आदेश से एके-47 से गोलियां चलाई गईं हैं. आप यदि वीडियो देखें तो कोई हवाई फायरिंग नहीं की गई है, निशाना लगाकर गोली चलाई गई है. तीन छात्रों को गोली लगी है." वहीं, गोलीबारी करते जवान का वीडियो अपलोड करते हुए उन्होंने लिखा कि कल कोई भी पुलिसकर्मी किसी भी नेता, मंत्री-मुख्यमंत्री पर कभी भी कहीं भी अकारण गोली चला सकता है. उन्होंने पटना में सोमवार की देर रात प्रेस कांफ्रेंस में सीवान में एके-47 से गोली चलाने के मामले की न्यायिक जांच की मांग करते हुए कहा कि किसी सिपाही को निलंबित करना काफी नहीं है. उनका कहना है कि बिहार सरकार आंदोलनकारियों को प्रताड़ित कर रही है, उन्हें झूठे मुकदमे में फंसा रही है.

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दूसरी तरफ, इस मामले पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक्स पर किए पोस्ट में लिखा कि छात्रों के खिलाफ पूरा का पूरा सिस्टम ही जानलेवा है. दिल्ली में छात्रों पर पैलेट गन चली और बिहार में एके-47. उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, बिहार हो या दिल्ली- हर जगह पैटर्न एक ही है. पूर्णिया के निर्दलीय सांसद पप्पू यादव कहते हैं, "क्या हमारे बच्चे आतंकवादी हैं. क्या अपने अधिकारों की बात उठाना गलत है. बिहार में आतंक का माहौल बना दिया गया है."

जान-माल व सरकारी संपत्ति की सुरक्षा के लिए फायरिंग

शुरूआती ना-नुकुर के बाद प्रारंभिक जांच में पुष्टि होने पर अंतत: पुलिस मुख्यालय ने कार्रवाई की और एके-47 से गोलीबारी करने के आरोपित जवान अभिषेक पटेल को सस्पेंड कर दिया गया. हालांकि, पुलिस मुख्यालय ने दावा किया है कि जिस स्थान पर जवान ने चार राउंड फायरिंग की, वहां कोई घायल नहीं हुआ. सीवान की घटना में घायल तीनों युवक वहां से करीब डेढ़ से दो किलोमीटर अलग-अलग जगहों पर मिले.

मुख्यालय द्वारा सोमवार को जारी एक बयान में कहा गया कि 25 जुलाई को सिवान शहर में जेपी चौक पर प्रदर्शनकारियों ने पुलिसकर्मियों को घेर लिया था. इस दौरान वहां तैनात सिपाही ने उग्र भीड़ से निकलने तथा जान-माल व सरकारी संपत्ति की सुरक्षा के लिए हवाई फायरिंग की. इस मौके पर मौजूद किसी व्यक्ति के घायल होने की सूचना नहीं है. एसपी पूरन झा के अनुसार, "भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पहले चेतावनी दी जाती है और शांतिपूर्वक हटने का मौका दिया जाता है. जरूरत पड़ने पर ही न्यूनतम बल प्रयोग किया जाता है. सामान्य प्रदर्शन में पैलेट गन या एके-47 जैसे घातक हथियारों का इस्तेमाल एसओपी का हिस्सा नहीं है."

बिहार सरकार ने लिया यू-टर्न, रद्द करेगी एफआईआर

दिल्ली में केंद्र सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी के बीच देशभर में प्रदर्शनकारियों व आयोजकों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर रद्द किए जाने का समझौता होने के बावजूद बिहार पुलिस तेज कार्रवाई कर प्रदर्शन में शामिल लोगों की धर-पकड़ कर रही थी. पटना जिला प्रशासन ने अखबारों में युवकों की तस्वीरें प्रकाशित करवाई तथा इन्हें असामाजिक तत्व बताते हुए लोगों से सूचना देने की अपील की. लेकिन, सोमवार की शाम बिहार सरकार ने यू-टर्न ले लिया.

गृह विभाग के विशेष सचिव की ओर से जारी बयान में कहा गया कि सरकार छात्रों के प्रति संवेदनशील है. 26 जुलाई, 2026 की शाम छह बजे तक बिहार में इस आंदोलन में शामिल किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कोई नई कानूनी या दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी. इस समयसीमा से पहले दर्ज एफआईआर, शिकायतें या शो-कॉज वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी. आंदोलन में गिरफ्तार या हिरासत में लिए गए सभी लोगों को जल्द रिहा किया जाएगा. उनके खिलाफ भविष्य में भी किसी तरह प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष कार्रवाई नहीं होगी.

हालांकि, छात्र नेताओं को सरकार के इस आदेश पर संदेह है. नाम नहीं प्रकाशित करने की शर्त पर एक ने डीडब्ल्यू से कहा, "जब शनिवार को डिटेन करने के बाद रविवार की रात को प्रदर्शनकारियों को पटना की कोर्ट में पेश किया गया तो क्या पता कि कितनों पर एफआईआर शाम छह बजे के बाद किया गया हो. अगर नीयत साफ होती तो कोई डेडलाइन नहीं फिक्स किया जाता."

जब तक आखिरी छात्र घर नहीं पहुंच जाता, तब तक संघर्ष की चेतावनी

बिहार सरकार के इस फैसले के ठीक पहले आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने पटना के बेउर जेल में बंद सभी साथियों व छात्र नेताओं से मुलाकात की थी और कहा था कि अगर गिरफ्तार किए गए प्रदर्शनकारियों की रिहाई नहीं होगी तो जो मंजर दिल्ली के जंतर-मंतर पर देखा गया था, वह बिहार के अलग-अलग जिलों में देखने को मिलेगा और 30 जुलाई को पूरे बिहार में बड़ा आंदोलन होगा. उन्होंने बिहार सरकार द्वारा प्रदर्शनकारियों को रिहा किए जाने की घोषणा के बाद भी कहा कि यह संघर्ष तब तक अनवरत जारी रहेगा, जब तक दर्ज किए गए सभी मुकदमे वापस नहीं ले लिए जाते हैं और आखिरी छात्र अपने घर नहीं पहुंच जाता है.

दूसरी तरफ, सोमवार को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने भी एक्स पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को टैग करते हुए प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग की थी. सीजेपी ने मंगलवार तक की मोहलत देते हुए ऐसा नहीं किए जाने पर फिर से आंदोलन की चेतावनी दी थी.

(The above story first appeared on LatestLY on Jul 28, 2026 05:50 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).