28 जुलाई की बड़ी खबरें
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ईरान युद्ध शुरू होने के बाद नेतन्याहू और ट्रंप की पहली मुलाकात
जेन जी युवतियों को कंगना रनौत ने 'गटर जेनरेशन' कहा
सुप्रीम कोर्ट का आदेश: नाबालिगों और बिना आपराधिक रिकॉर्ड वाले छात्रों को तुरंत रिहा करें
पाकिस्तान में बारिश और बाढ़ की वजह से 100 से ज्यादा लोगों की मौत
पाकिस्तान में बारिश और बाढ़ की वजह से 100 से ज्यादा लोगों की मौत
पाकिस्तान में पिछले एक महीने से जारी मानसून की बारिश और फ्लैश फ्लड के कारण मरने वालों की संख्या 100 के पार पहुंच गई है. राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, 26 जून से अब तक देश भर में 109 लोगों की जान जा चुकी है. सबसे ज्यादा लोगों की मौत मकान और छत गिरने की वजह से हुई हैं. मरनेवालों की लगभग आधी संख्या अफगानिस्तान सीमा से सटे उत्तर-पश्चिमी प्रांत खैबर पख्तूनख्वा में दर्ज की गई हैं.
क्यों अफगानिस्तान में मौसम इतना जानलेवा होता जा रहा है?
मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि इस सप्ताह के अंत में देश भर में और अधिक भारी बारिश होने की संभावना है. संभावित खतरे को देखते हुए अधिकारियों ने आपदा प्रबंधन की तैयारियों की समीक्षा की है. नदियों के किनारे रहने वाले लोगों को समय पर चेतावनी जारी करने की योजना बनाई गई है.
हाल ही में हुई भारी बारिश से लाहौर सहित देश के कई हिस्सों में जलभराव हो गया था. इससे लोगों को आने-जाने में दिक्कतों हुई. लोगों ने सरकार की तैयारियों और खराब व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं. अधिकारियों ने अंदेशा जताया है कि स्थिति 2022 की भीषण बाढ़ जैसी हो सकती है. वर्ष 2022 की बाढ़ में पाकिस्तान का एक-तिहाई हिस्सा पानी में डूब गया था और 1,737 लोगों की मौत हुई थी.
एआई कॉन्टेंट पर लेबल लगाना अनिवार्य करेगा यूरोपीय संघ
यूरोपीय संघ के एआई पारदर्शिता नियम के तहत डीपफेक और दूसरे एआई-जेनरेटेड कॉन्टेंट पर लेबल लगाना अब अनिवार्य होगा. यह नियम रविवार, 02 अगस्त से लागू होगा. इस नियम का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यूजर तुरंत पहचान सकें कि ऑनलाइन देखी जा रही सामग्री असली है या एआई द्वारा बनाई गई.
नए नियमों के अनुसार, चैटबॉट्स को यूजर को स्पष्ट रूप से सूचित करना होगा कि वे एआई हैं. कंपनियों को एआई-जनरेटेड फोटो, वीडियो, ऑडियो या टेक्स्ट पर स्पष्ट लेबल या वाटरमार्क लगाना होगा. नियमों का पालन नहीं करने वाली कंपनियों पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा. यूरोपीय संघ के अधिकारियों का कहना है कि यह कदम तेजी से फैलते फर्जी कंटेंट और दुष्प्रचार को रोकने तथा डिजिटल कॉन्टेंट पर नागरिकों का भरोसा बनाए रखने के लिए उठाया गया है.
यह कानून मुख्य रूप से व्यावसायिक और सार्वजनिक हित से जुड़े कॉन्टेंट पर लागू होगा. हालांकि, व्यक्तिगत उपयोग के लिए एआई का इस्तेमाल करने वाले लोगों पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा. इसके अलावा, आर्टिस्टिक और क्रिएटिव कामों को इस नियम से छूट दी गई है. बाजार में पहले से मौजूद एआई सिस्टम को इन मानकों को अपनाने के लिए 2 दिसंबर तक का समय दिया गया है.
सुप्रीम कोर्ट का आदेश: नाबालिगों और बिना आपराधिक रिकॉर्ड वाले छात्रों को तुरंत रिहा करें
सुप्रीम कोर्ट ने देश भर में छात्र प्रदर्शनों के दौरान गिरफ्तार किए गए सभी नाबालिगों को तुरंत रिहा करने का आदेश दिया है. मुख्य न्यायाधीश सूर्याकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने पुलिस को निर्देश दिया है कि बिना आपराधिक रिकॉर्ड वाले प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई ना की जाए. साथ ही अदालत ने छात्रों का निजी डेटा सार्वजनिक करने पर भी रोक लगा दी है. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यह अंतरिम राहत असामाजिक तत्वों या आपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्तियों पर लागू नहीं होगी.
मुख्य न्यायाधीश सूर्याकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की बेंच ने कहा कि प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा की निष्पक्ष और गहन जांच होना बेहद जरूरी है. अदालत ने दिल्ली, महाराष्ट्र, बिहार, असम, केरल, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिवों के साथ-साथ केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है. शीर्ष अदालत ने कहा है कि पुलिस की कथित बर्बरता और पुलिसकर्मियों के खिलाफ हुई हिंसा, दोनों मामलों की स्वतंत्र जांच जरूरी है.
जेन जी युवतियों को कंगना रनौत ने 'गटर जेनरेशन' कहा
कंगना रनौत ने इंस्टाग्राम पर 'युवा हिंदू महिलाओं' के बारे में कहा है कि वे 'ड्रग्स, शराब और अनगिनत बॉडी काउंट (शारीरिक संबंधों) के लिए अपनी आजादी' का इस्तेमाल कर रही हैं.
अभिनेत्री से नेता बनीं कंगना रनौत सोशल मीडिया पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का विरोध करती आ रही हैं. अब उन्होंने 'युवा हिंदू महिलाओं' पर निशाना साधते हुए कहा कि वे 'आजादी की मांग करती हैं' लेकिन 'सिस्टम को देने के लिए उनके पास कुछ नहीं है'.
अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी में कंगना रनौत ने लिखा, "सबसे चौंकाने वाली बात उन युवा हिंदू महिलाओं का व्यवहार है, जो इंडिपेंडेंट करियर वूमन की नकल करना चाहती हैं, बिना उस स्वतंत्रता के लिए लड़े. सही मायने में स्वतंत्र महिलाएं विद्रोही फैसले लेती हैं और साहसी विचार रखती हैं. वे लीक से हटकर करियर चुनती हैं और अपने फैसलों की जिम्मेदारी खुद लेती हैं क्योंकि वे अपने पैरों पर खड़ी होती हैं. वे अपने माता-पिता या परिवारों की कीमत पर ऐसा नहीं करती हैं."
कंगना ने आगे लिखा, "यह तथाकथित पश्चिमी रंग में रंगी भारतीय महिलाओं की एक नई पीढ़ी है. मैं इन्हें 'जनरेशन गटर' कहती हूं. इनमें से कुछ के पास सिस्टम को देने के लिए कुछ नहीं है. वे पढ़ाई-लिखाई में अच्छी नहीं हैं, और वे इतनी बदसूरत और भ्रष्ट हैं कि गृहिणी भी नहीं बन सकतीं. फिर भी वे ड्रग्स लेने, शराब पीने या अनगिनत बॉडी काउंट रखने की अपनी आजादी का गर्व से प्रदर्शन करती हैं, और वास्तव में स्वतंत्र हुए बिना ही खुद को आजाद साबित करने के लिए लड़ते हुए अपने माता-पिता की कमाई पर बेशर्मी से पलती हैं."
राजनेताओं ने कंगना रनौत द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा पर कड़ी आपत्ति जताई है. एआईएमआईएम नेता वारिस पठान ने मांग की कि कंगना 'जनरेशन जी' प्रदर्शनकारियों से माफी मांगें. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी उनकी इन टिप्पणियों पर ध्यान देने का आग्रह किया. कांग्रेस नेता भाई जगताप ने कहा कि प्रदर्शनकारियों पर हमला करने के बजाय उन्हें विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्रों के साथ हुए व्यवहार पर चिंता व्यक्त करनी चाहिए थी.
अमेरिकी जनता ईरान युद्ध के पक्ष में नहीं: सर्वे
अमेरिका और ईरान के बीच बीते पांच महीनों से जारी युद्ध के प्रति अमेरिकी जनता का समर्थन घटकर अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स और इप्सोस पोलिंग इंस्टीट्यूट द्वारा किए गए एक नए सर्वे के अनुसार, अब केवल एक-तिहाई अमेरिकी नागरिक ही अपने देश की सैन्य कार्रवाई का समर्थन कर रहे हैं. इसके उलट 69 प्रतिशत लोगों का मानना है कि राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप इस युद्ध के उद्देश्यों को समझाने में विफल रहे हैं. इस सर्वे में डॉनल्ड ट्रंप की कुल रेटिंग 37 प्रतिशत दर्ज की गई है.
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व्हाइट हाउस की प्रवक्ता ने इस सर्वेक्षण के नतीजों को खारिज कर दिया है. उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ऐसे अस्थायी सर्वेक्षणों के आधार पर फैसले नहीं लेते हैं. प्रवक्ता ने जोर देकर कहा कि ईरान के खिलाफ युद्ध का मुख्य उद्देश्य तेहरान की परमाणु हथियार बनाने की क्षमता को नष्ट करना है. यह सर्वेक्षण ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रपति चुनाव अभियान के दौरान विदेशी युद्धों से दूर रहने का वादा करने वाले ट्रंप के कार्यकाल में अब तक 18 अमेरिकी सैनिक मारे जा चुके हैं. इसके अलावा ईरान और लेबनान में हजारों लोगों ने अपनी जान गंवाई है.
ईरान युद्ध शुरू होने के बाद नेतन्याहू और ट्रंप की पहली मुलाकात
इस्राएली प्रधानमंत्री बेन्यामिन नेतन्याहू मंगलवार, 28 जुलाई को अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप से मुलाकात करेंगे. ईरान के खिलाफ साझा युद्ध शुरू करने के बाद दोनों नेताओं की यह पहली मुलाकात है. दोनों नेता घरेलू राजनीतिक दबावों का सामना कर रहे हैं. नेतन्याहू को अपने देश में चुनाव का सामना करना है, जबकि ट्रंप पर भी अमेरिका में युद्ध खत्म करने का दबाव है. बातचीत में ईरान युद्ध, लेबनान समझौते और अब्राहम समझौते के विस्तार पर चर्चा होने की उम्मीद है.
हाल के महीनों में ईरान नीति को लेकर डॉनल्ड ट्रंप और नेतन्याहू के संबंधों में मतभेद देखने को मिले हैं. हालांकि, ट्रंप का कहना है कि वे ईरान के मुद्दे पर काफी हद तक एक मत हैं. नेतन्याहू का मानना है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को खत्म करना बेहद जरूरी है. इस बैठक के दौरान नेतन्याहू, अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी खुफिया जानकारी साझा करने की योजना बना रहे हैं.
इसके साथ ही, इस्राएल ने लेबनान और गाजा में शांति प्रयासों के लिए कुछ कदम उठाए हैं. लेबनान के कुछ गांवों में लेबनानी सेना को तैनात करने के एक पायलट प्रोजेक्ट पर सहमति बनी है. वहीं गाजा में अंतरराष्ट्रीय स्थिरता बल के पहले सदस्यों के प्रवेश को सैद्धांतिक मंजूरी दी गई है. अमेरिका में इस्राएल के प्रति समर्थन में कमी आई है. इस बैठक में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस के भी शामिल होने की संभावना है.
जंतर-मंतर पर एआई से प्रदर्शनकारियों की निगरानी करने पर उठे सवाल
जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों की एआई से लैस तकनीकों से निगरानी किए जाने पर सवाल उठ रहे हैं. एक प्रदर्शनकारी छात्रा आइशी घोष ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर मांग की है कि प्रदर्शनकारियों की सामूहिक निगरानी को असंवैधानिक करार दिया जाए और प्रदर्शन के दौरान इकट्ठे किए गए सभी व्यक्तिगत डेटा को नष्ट करने का निर्देश दिया जाए. उन्होंने अपनी याचिका में निगरानी तकनीक के इस्तेमाल के लिए गाइडलाइन बनाने का भी अनुरोध किया.
निगरानी को लेकर विवाद पिछले हफ्ते शुरू हुआ जब कई प्रदर्शनकारियों ने सोशल मीडिया पर एक मोबाइल पुलिस सर्विलांस वैन की तस्वीर डाली, जिस पर चारों तरफ की तस्वीरें खींचने वाले कैमरे लगे हुए थे. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, पुलिस प्रदर्शनस्थल पर आने वाले प्रदर्शनकारियों के इंस्टाग्राम हैंडल नोट करते हुए भी देखी गई. पुलिस इंस्पेक्टर सुनील कुमार ने रॉयटर्स से कहा कि यह कदम इसलिए उठाया गया था ताकि आपराधिक पृष्ठभूमि वाला कोई भी व्यक्ति प्रदर्शन में न घुस सके.
भारत में फेशियल रिकॉग्निशन टेक्नोलॉजी को लेकर कोई कानून मौजूद नहीं है. कार्यकर्ताओं का कहना है कि जंतर-मंतर पर इस तकनीक के जरिए हुई निगरानी कानून का उल्लंघन था. इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन ने भी प्रदर्शन स्थल से इकट्ठे किए गए बायोमीट्रिक डेटा को डिलीट करने की अपील की है. वहीं, सरकार ने कहा है कि ये कदम कानूनी थे और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाए गए थे. दिल्ली पुलिस ने अपने बयान में कहा कि उन्होंने फेशियल रिकॉग्निशन टेक्नोलॉजी के जरिए किसी की स्वतंत्रता को सीमित नहीं किया.
(The above story first appeared on LatestLY on Jul 28, 2026 05:50 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

