ताजा खबरें | रास में उठी भारतीय कंसल्टेंसी कंपनियों को प्राथमिकता देने के लिए नियम बनाने की मांग

नयी दिल्ली, 10 फरवरी राज्यसभा में बुधवार को भाजपा के एक सदस्य ने नयी अमेरिकी संघीय व्यय नीति की तर्ज पर ठेकों में भारतीय कंसल्टेंसी कंपनियों को प्राथमिकता दिए जाने के लिए नियम बनाने की मांग की।

शून्यकाल में यह मुद्दा उठाते हुए भाजपा के डॉ विनय पी सहस्रबुद्धे ने कहा कि नए अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने पिछले माह संघीय एजेंसियों को अमेरिका में ही उत्पादों की खरीद करने और सेवाएं देने के लिए कहा था।

उन्होंने कहा ‘‘भारत सरकार को भी एक ऐसी नयी नीति तैयार करनी चाहिए जिसमें विदेशी एजेंसियों के बजाय भारतीय कंसल्टेंसी कंपनियों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।’’

सहस्रबुद्धे ने कहा कि आवश्यक अनुभव संबंधी मानक की पात्रता के अभाव में स्थानीय कंसल्टेंसी कंपनियां विदेशी कंपनियों की तुलना में पीछे रह जाती हैं।

उन्होंने कहा ‘‘कंसल्टेंसी एक बड़ा उद्योग है लेकिन इसमें विदेशी एजेंसियों का वर्चस्व है।’’

उन्होंने कहा कि उद्योग संघ ‘एसोचैम’ के अनुसार, साल 2020 में कन्सल्टेन्सी कारोबार का टर्नओवर 27,000 करोड़ रुपये का रहा।

सहस्रबुद्धे ने कहा ‘‘पब्लिक पॉलिसी एक लुभावना क्षेत्र है और बिजनेस स्कूलों के 80 फीसदी छात्र कंसल्टेंसी कंपनियों में जाते हैं। समय को देखते हुए नियमों में बदलाव की जरूरत है ताकि घरेलू कंसल्टेंसी कंपनियों को तरजीह मिल सके।’’

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