नयी दिल्ली, 19 जनवरी ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) के एक बयान में दावा किया गया है कि दिल्ली विश्वविद्यालय के सैकड़ों छात्रों ने बृहस्पतिवार को चार साल के स्नातक कार्यक्रम (एफवाईयूपी) को वापस लेने की मांग को लेकर मार्च निकाला।
बयान में कहा गया है कि ‘आइसा’ द्वारा बुलाए गए मार्च के दौरान छात्रों ने एफवाईयूपी को वापस लेने, एईसी विकल्पों में अंग्रेजी को शामिल करने, पाठ्यक्रमों को कमजोर न करने और फीस वृद्धि पर रोक लगाने की मांग की।
बयान में कहा गया है, “एफवाईयूपी के खिलाफ ‘आइसा’ के आह्वान पर दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रथम वर्ष के सैकड़ों छात्र नॉर्थ कैंपस में जमा हुए।”
एफवाईयूपी को दिल्ली विश्वविद्यालय में नई शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत लागू किया गया है।
नए पाठ्यक्रम ढांचे के तहत प्रत्येक पाठ्यक्रम के लिए ‘क्रेडिट स्कोर’ पेश किए गए हैं और छात्रों के पास शोध के साथ या बिना शोध के तीन साल का ‘ऑनर्स कोर्स’ या चार साल का ‘ऑनर्स कोर्स’ करने का विकल्प होगा।
‘आइसा’ की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष अभिज्ञान ने कहा, “एफवाईयूपी की यह विफलता सिर्फ कार्यान्वयन के स्तर पर नहीं है, बल्कि सिद्धांत के स्तर पर भ्रष्टाचार है। सरकार हमें बता रही है कि शिक्षा अब लोगों के लिए नहीं है, बल्कि मुनाफे के लिए है।”
दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एन. सचिन ने मार्च के दौरान मोदी सरकार के तहत सार्वजनिक शिक्षा की स्थिति पर बात करते हुए दावा किया, “एफवाईयूपी के खिलाफ यह लड़ाई देश में शिक्षा की प्रकृति और भावना के लिए एक निर्णायक लड़ाई है।”
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)












QuickLY