नयी दिल्ली, एक अप्रैल दिल्ली में वायु प्रदूषण की स्थिति बिगड़ने की वजह प्रदूषण नियंत्रण तंत्र में खामियां हैं। मंगलवार को विधानसभा में पेश की गई सीएजी की रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आयी।
रिपोर्ट के अनुसार, पीयूसी प्रमाणपत्र जारी करने में अनियमितताएं, वायु गुणवत्ता निगरानी प्रणाली का अविश्वसनीय होना और प्रदूषण नियंत्रण उपायों को खराब तरीके से लागू करना सहित अन्य कारणों से दिल्ली में वायु प्रदूषण की स्थिति बिगड़ी।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता द्वारा पेश की गई ‘दिल्ली में वाहनों से होने वाले वायु प्रदूषण’ पर रिपोर्ट में राष्ट्रीय राजधानी में प्रदूषण की स्थिति बिगड़ने के पीछे प्रमुख कारणों के रूप में प्रमुख नीतिगत कमियों और कमजोर क्रियान्वयन तथा एजेंसियों के बीच खराब समन्वय को उजागर किया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, 1.08 लाख से अधिक वाहनों को प्रदूषण नियंत्रण (पीयूसी) प्रमाणपत्र जारी किए गए, जबकि वे अनुमेय सीमा से अधिक कार्बन मोनोऑक्साइड (सीओ) और हाइड्रोकार्बन (एचसी) उत्सर्जित कर रहे थे। रिपोर्ट में बताया गया कि कई मामलों में एक ही समय में कई वाहनों को प्रमाणपत्र जारी किए गए, जिनमें से कुछ में मिनट भर का अंतर था।
रिपोर्ट के मुताबिक, 2015 से 2020 के बीच प्रदूषण सीमा को पार करने वाले लगभग 4,000 डीजल वाहन अब भी सड़कों पर बेरोकटोक रूप से दौड़ रहे हैं और उच्च उत्सर्जन स्तर के बावजूद इन वाहनों को सड़क पर चलने की अनुमति मिली हुई है।
दिल्ली में पिछली आम आदमी पार्टी (आप) सरकार के प्रदर्शन पर कैग की 14 रिपोर्टों में से आबकारी और स्वास्थ्य सहित आठ रिपोर्टें अब तक भाजपा सरकार द्वारा विधानसभा में पेश की जा चुकी हैं।
भाजपा सरकार ने पांच फरवरी को हुए विधानसभा चुनावों में बहुमत पाकर 26 साल से अधिक समय के बाद दिल्ली की सत्ता संभाली है।
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