नयी दिल्ली, 22 अक्टूबर दिल्ली की एक अदालत ने फरवरी में उत्तर पूर्वी दिल्ली में सांप्रदायिक हिंसा के दौरान इंटेलीजेंस ब्यूरो (आईबी) के अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के सिलसिले में गिरफ्तार एक व्यक्ति की जमानत याचिका बृहस्पतिवार को खारिज कर दी।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विनोद यादव ने कहा कि कई गवाहों के बयान से यह प्रतीत होता है कि आरोपी समीर खान और अन्य व्यक्तियों को मुख्य आरोपी ताहिर हुसैन ने सांप्रदायिक आधार पर भड़काया, जिसके बाद उन्होंने दूसरे समुदाय के लोगों पर हमले किए।
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मामले में आम आदमी पार्टी (आप) के पूर्व पार्षद हुसैन न्यायिक हिरासत में हैं।
अदालत ने कहा कि इस चरण में पर्याप्त सामग्री मौजूद है जिसमें खान के ‘‘दंगाई भीड़’’ का हिस्सा होने के तौर पर पहचान की गई है। यह भीड़ आगजनी, लूट और सार्वजनिक एवं निजी संपत्ति की तोड़फोड़ और सांप्रदायिक नारे लगाने और दूसरे समुदाय के लोगों पर हमला करने में संलिप्त थी।
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न्यायाधीश ने अपने आदेश में कहा, ‘‘मेरे विचार से मामले में हम ‘शुरुआती चरण’ में हैं और इस चरण में जमानत के मामले पर गौर कर रही अदालत को जांच एजेंसी द्वारा जुटाई गई सामग्री पर भी विचार करना होगा।’’
आदेश में कहा गया, ‘‘यह स्पष्ट है कि आवेदक (खान) जिस मोबाइल का कथित तौर पर इस्तेमाल कर रहा था उसका सीडीआर (कॉल डिटेल रिकॉर्ड) स्थान घटना के दिन घटनास्थल पर या उसके आसपास था। आवेदक जैसा कह रहा है कि मोबाइल उसका नहीं है, लेकिन मामला ऐसा नहीं है।’’
सुनवाई के दौरान खान के वकील ने कहा कि मामले में उसे गलत तरीके से फंसा दिया गया और मामले में प्राथमिकी दर्ज करने में विलंब किया गया।
खान से किसी तरह का हथियार जब्त नहीं हुआ और जिन गवाहों ने खान के दंगाई भीड़ के हिस्से के तौर पर पहचान की वे सब ‘‘फर्जी’’ हैं।
पुलिस की तरफ से पेश हुए विशेष लोक अभियोजक मनोज चौधरी ने कहा कि खान के खिलाफ मामले गंभीर प्रकृति के हैं और अगर उन्हें जमानत पर रिहा किया जाता है तो वह गवाहों को धमका सकता है क्योंकि वे उसी इलाके के हैं।
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