नयी दिल्ली, आठ नवंबर आम आदमी पार्टी (आप) के पूर्व निगम पार्षद ताहिर हुसैन ने शुक्रवार को यहां एक अदालत में दलील दी कि दिल्ली पुलिस ने उसके खिलाफ सबूत के तौर पर जो व्हाट्सऐप चैट पेश की है, उसने लोगों को दंगे के लिए नहीं उकसाया था।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश समीर बाजपेयी 2020 में उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों से संबंधित “बड़ी साजिश” के दावों के मामले में हुसैन और अन्य के खिलाफ आरोप तय करने को लेकर दलीलें सुन रहे थे।
हुसैन के वकील ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने दंगों को भड़काने में उसकी संलिप्तता दिखाने के लिए व्हाट्सएप चैट के तौर पर कुछ सबूत पेश किए थे, लेकिन इन संदेशों में लोगों को हिंसा में शामिल होने के लिए नहीं कहा गया था।
वकील ने कहा, "कहीं भी लोगों को भारत सरकार या उसकी एजेंसियों के खिलाफ हथियार उठाने के लिए नहीं कहा गया था।"
वकील ने कहा कि चैट में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन पर चर्चा की गई थी।
उन्होंने अदालत से पूछा कि क्या चक्का-जाम एक "आतंकवादी गतिविधि" थी।
मामले की जांच कर रहे दिल्ली पुलिस के विशेष प्रकोष्ठ ने विभिन्न गवाहों के बयान और सीसीटीवी फुटेज के साथ-साथ इन चैट को सबूत के तौर पर इस्तेमाल किया है।
इससे पहले, 25 अक्टूबर को, हुसैन ने दावा किया था कि नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (सीएए) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन पर चर्चा आतंकवाद या सशस्त्र विद्रोह जैसा कार्य नहीं था।
फरवरी 2020 के सांप्रदायिक दंगों के "मास्टरमाइंड" होने के आरोप में हुसैन, कार्यकर्ता शरजील इमाम और खालिद सैफ समेत 20 लोगों के खिलाफ आतंकवाद रोधी गैरकानूनी गतिविधियां (निवारण) अधिनियम और भारतीय दंड संहिता के कई प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया था। दंगों में 53 लोगों की मौत हुई थी और 700 से अधिक घायल हो गए थे।
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