देश की खबरें | हंस राज हंस, सिरसा के खिलाफ निचली अदालत की कार्यवाही पर दिल्ली उच्च न्यायालय की रोक

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया द्वारा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता हंस राज हंस और मनजिंदर सिंह सिरसा के खिलाफ दायर मानहानि के एक मामले में निचली अदालत में जारी कार्यवाही पर बृहस्पतिवार को रोक लगा दी।

नयी दिल्ली, पांच जनवरी दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया द्वारा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता हंस राज हंस और मनजिंदर सिंह सिरसा के खिलाफ दायर मानहानि के एक मामले में निचली अदालत में जारी कार्यवाही पर बृहस्पतिवार को रोक लगा दी।

सिसोदिया ने उन पर कथित रूप से भ्रष्टाचार के आरोप लगाने के लिए लोकसभा सदस्य हंस और विधायक सिरसा समेत छह लोगों के खिलाफ मानहानि की शिकायत दर्ज कराई थी।

हंस और सिरसा ने अपने खिलाफ दायर मानहानि मामले को रद्द करने के लिए याचिका दी थी जिसे पिछले साल 23 दिसंबर को निचली अदालत ने खारिज कर दिया था। इसके विरोध में दोनों नेताओं ने दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया था।

आज न्यायमूर्ति दिनेश कुमार शर्मा ने हंस और सिरसा द्वारा, उनके खिलाफ दर्ज मानहानि मामला रद्द करने के लिए दायर आवेदनों को खारिज करने के निचली अदालत के पिछले साल 23 दिसंबर के आदेश को चुनौती देने वाली (हंसा और सिरसा की) याचिकाओं पर सिसोदिया को नोटिस जारी कर उनसे जवाब मांगा।

उच्च न्यायालय ने निचली अदालत में कार्यवाही रोकने के लिए भी आम आदमी पार्टी (आप) के नेता सिसोदिया को नोटिस भेजा है।

उच्च न्यायालय ने कहा कि इस बीच सुनवाई अदालत में वर्तमान याचिकाकर्ताओं के खिलाफ कार्यवाही निलंबित रहेगी। मामले की अगली सुनवाई 10 मार्च को होगी।

सुनवाई अदालत ने 28 नवंबर 2019 को आदेश जारी कर सिसोदिया द्वारा दायर आपराधिक मानहानि मामले में छह लोगों को नोटिस जारी किया था।

सिसोदिया ने दिल्ली के सरकारी स्कूलों की कक्षाओं के संबंध में कथित रूप से उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगाने के लिए भाजपा नेताओं- सांसद मनोज तिवारी, हंस राज हंस, प्रवेश वर्मा, विधायक- मनजिंदर सिंह सिरसा, विजेंद्र गुप्ता और पार्टी प्रवक्ता हरीश खुराना के खिलाफ शिकायत दी थी।

इसके बाद हंस और सिरसा ने इस मामले को रद्द करने के लिए आवेदन दिया था, जिसे पिछले साल 23 दिसंबर को अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट ने खारिज कर दिया। इस फैसले को दोनों नेताओं ने उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी।

सिसोदिया ने कहा था कि भाजपा नेताओं द्वारा संयुक्त रूप से या व्यक्तिगत रूप से लगाए गए आरोप गलत और अपमानजनक हैं। उन्होंने कहा था कि ये आरोप उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने के लिए लगाए गए थे।

मानहानि मामले के दोषी को अधिकतम दो साल जेल की सजा हो सकती है।

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