देश की खबरें | दिल्ली उच्च न्यायालय ने न्यायमूर्ति धर्मेश शर्मा को विदाई दी

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नयी दिल्ली, 30 मई दिल्ली उच्च न्यायालय ने न्यायमूर्ति धर्मेश शर्मा को शुक्रवार को विदाई दी तथा कानून के न्यायिक और प्रशासनिक दोनों पक्षों में उनके योगदान की सराहना की।

न्यायमूर्ति शर्मा आठ जून को सेवानिवृत्त होने वाले हैं, लेकिन उच्च न्यायालय में अगले सप्ताह से शुरू हो रहे ग्रीष्मकालीन अवकाश के कारण आज ही उनका अंतिम कार्यदिवस था।

उच्च न्यायालय में 45 स्थायी और 15 अतिरिक्त न्यायाधीशों की स्वीकृत शक्ति के मुकाबले फिलहाल 36 न्यायाधीश हैं।

मुख्य न्यायाधीश डी के उपाध्याय ने विदाई समारोह में कहा कि न्यायमूर्ति शर्मा जैसे "अनुभवी न्यायाधीश" का यहां से चला जाना पूरी (न्यायिक) व्यवस्था के लिए क्षति है। न्यायमूर्ति शर्मा ने 30 से अधिक वर्षों तक कानूनी पेशे में अपनी सेवा दी है।

न्यायमूर्ति शर्मा ने कहा कि "जमीनी स्तर से उठकर" इस मुकाम तक की अपनी "यात्रा" पर उन्हें गर्व है।

हालांकि, उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में अपने ‘‘अपेक्षाकृत संक्षिप्त’’ कार्यकाल के मद्देनजर उन्होंने कहा कि काश वह ‘‘मामलों के निपटान के लिए और अधिक काम’’ कर पाते।

दिल्ली उच्च न्यायिक सेवा में न्यायिक अधिकारी न्यायमूर्ति शर्मा को 17 मई, 2023 को उच्च न्यायालय का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। वह 22 जुलाई, 2024 को स्थायी न्यायाधीश बने।

न्यायमूर्ति शर्मा ने 2019 में जिला न्यायाधीश के रूप में 2017 के उन्नाव बलात्कार मामले में भाजपा से निष्कासित नेता कुलदीप सिंह सेंगर को दोषी ठहराया था और आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

अपने संबोधन में न्यायमूर्ति शर्मा ने कहा कि न्यायिक सेवाएं प्रतिभाशाली व्यक्तियों से भरी हुई हैं, जिन्हें पोषण और प्रोत्साहन मिलना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि ‘‘बार न्यायाधीशों का शिक्षक है और बार न्यायाधीशों का न्यायाधीश है’’।

अपनी यात्रा पर विचार करते हुए उन्होंने यह भी कहा कि वह ‘‘पूर्ण धर्मनिरपेक्षता में विश्वास करते हैं’’ और तीस हजारी अदालत में लगातार हड़ताल के कारण ‘‘व्यवधानों से हताश’’ होने के बाद उन्होंने न्यायिक सेवाओं की तैयारी पर ध्यान केंद्रित करने का फैसला किया।

न्यायमूर्ति शर्मा 1992 में दिल्ली न्यायिक सेवा में शामिल हुए और 2003 में उन्हें उच्च न्यायिक सेवा में पदोन्नत किया गया।

उच्च न्यायालय में पदोन्नति के समय वह नयी दिल्ली जिले के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के रूप में तैनात थे।

उन्होंने 1987 में दिल्ली विश्वविद्यालय के कैंपस लॉ सेंटर से एल.एल.बी. की डिग्री पूरी की।

उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में अपने कार्यकाल में उन्होंने कई ऐतिहासिक फैसले दिए।

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