नयी दिल्ली, 11 दिसंबर दिल्ली की एक अदालत ने पुलिस आयुक्त संजय अरोड़ा से रिपोर्ट तलबकर पूछा है कि उस व्यक्ति को गिरफ्तार करने के लिए कोई प्रयास क्यों नहीं किए गए, जिसे मादक पदार्थ मामले में 10 साल सजा मिली थी लेकिन 1998 में अंतरिम जमानत मिलने के बाद वह फरार हो गया था और उसे हाल में गिरफ्तार किया गया है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एकता गौबा मान जामा मस्जिद थाने में 1994 में दर्ज प्राथमिकी से संबंधित कार्यवाही की सुनवाई कर रही थीं, जिसमें जांच अधिकारी ने दोषी अशोक कुमार यादव को अदालत के समक्ष पेश किया था।
अदालत ने जांच अधिकारी की दलीलों पर गौर किया कि यादव को 23 जनवरी 1995 को मादक पदार्थ संबंधी एनडीपीएस के तहत दोषी ठहराया गया था और अगले दिन 10 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई थी।
इसमें कहा गया कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने 27 जनवरी 1998 को यादव को 30 दिन की अंतरिम जमानत दी थी, जिसके बाद दोषी फरार हो गया और उसे पांच दिसंबर 2024 को गिरफ्तार किया गया।
छह दिसंबर के फैसले में अदालत ने यादव को फिर से जेल भेज दिया और कहा कि दोषी जमानत मिलने के बाद फरार हो गया लेकिन उसके विरुद्ध कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई जैसे कि भगोड़ा घोषित करना और गैर-जमानती वारंट जारी करना।
अदालत ने अपने आदेश को दिल्ली के पुलिस आयुक्त को भेजने का निर्देश दिया, ताकि वह जांच कर सकें तथा एक फरवरी 2025 तक किसी भी प्रतिनियुक्त सहायक पुलिस आयुक्त के माध्यम से लिखित में रिपोर्ट भेज सके।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)













QuickLY