नयी दिल्ली, नौ सितंबर सरकारी कंपनी कोल इंडिया की 54 खनन परियोजनाएं देरी से चल रही हैं। इसका मुख्य कारण पर्यावरण मंजूरियों में विलंब तथा पुनर्वास संबंधी मुद्दे हैं।
यह इस कारण से महत्वपूर्ण हो जाता है कि कोल इंडिया 2023-24 तक सालाना एक अरब टन उत्पादन का स्तर हासिल करने का लक्ष्य बनाकर चल रही है।
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कंपनी ने एक हालिया रिपोर्ट में कहा, ‘‘20 करोड़ और उससे अधिक की लागत वाली 123 कोयला परियोजनाएं कार्यान्वयन के विभिन्न चरणों में हैं, जिनमें से 69 परियोजनाएं निर्धारित समय पर हैं और 54 परियोजनाएं देरी से चल रही हैं।’’
कंपनी ने कहा कि इन परियोजनाओं के कार्यान्वयन में देरी के प्रमुख कारणों में वन मंजूरी (एफसी) प्राप्त करने में देरी और भूमि पर कब्जा, पुनर्वास और पुनर्वास से जुड़े मुद्दे शामिल हैं।
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कंपनी ने कहा कि उसके निदेशक मंडल ने 2019-20 के दौरान प्रति वर्ष 1320.4 लाख टन की कुल क्षमता वाली 18 खनन परियोजनाओं में 21,244.55 करोड़ रुपये के कुल निवेश को मंजूरी दी। वित्त वर्ष के दौरान 855.52 करोड़ रुपये की गैर-खनन परियोजनाओं को भी मंजूरी दी गयी।
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