दिल्ली, 12 जुलाई उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को दिल्ली पुलिस से कहा कि वह राजधानी निवासी उस महिला को परेशान नहीं करे जिसने रिज वन क्षेत्र में पेड़ों की अवैध कटाई को लेकर दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के खिलाफ मानहानि याचिका दायर की है।
न्यायमूर्ति अभय एस ओका और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने याचिकाकर्ता द्वारा उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए दायर याचिका पर नोटिस जारी किया।
पीठ ने कहा, ‘‘हम सभी प्राधिकारियों को स्पष्ट करते हैं कि कोई भी याचिकाकर्ता को केवल इसलिए परेशान करने का प्रयास नहीं करेगा कि उसने अवमानना याचिका दायर की और वह उच्चतम न्यायालय के आदेशों के उल्लंघन को इस अदालत के संज्ञान में लायी है।’’ .
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने अदालत को सूचित किया था कि शहर के पुलिस अधिकारी अन्य याचिकाकर्ता ‘नयी दिल्ली नेचर सोसाइटी’ के संबंध में भी पूछताछ कर रहे हैं।
शंकरनारायणन ने दावा किया था कि पुलिस ने उनके बैंक से भी संपर्क किया है और उनके खातों के बारे में विस्तृत जानकारी मांगी है।
पीठ ने शंकरनारायणन की दलील पर गौर किया और मामले में नोटिस जारी किया।
बिंदु कपूरिया ने अपनी अवमानना याचिका में आरोप लगाया है कि चार मार्च के शीर्ष अदालत के उस आदेश के बावजूद पेड़ काटे गए जिसमें इसके लिए दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) को अनुमति देने से इनकार कर दिया गया था और पेड़ों की कटाई के बारे में तथ्य अदालत से छिपाया गया था।
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