एजेंसी न्यूज

जरुरी जानकारी | स्थानीय तेल-तिलहन कीमतों में गिरावट का रुख (सामवें पैरा में मामूली संशोधन के साथ)

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में शनिवार को कारोबार में गिरावट का रुख दिखा। सस्ते आयातित तेल के आगे सरसों तेल तिलहन, सोयाबीन तेल, बिनौला, सीपीओ और पामोलीन जैसे अधिकांश तेल तिलहन कीमतों में गिरावट आई।

जरुरी जानकारी | स्थानीय तेल-तिलहन कीमतों में गिरावट का रुख (सामवें पैरा में मामूली संशोधन के साथ)

नयी दिल्ली, 31 दिसंबर दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में शनिवार को कारोबार में गिरावट का रुख दिखा। सस्ते आयातित तेल के आगे सरसों तेल तिलहन, सोयाबीन तेल, बिनौला, सीपीओ और पामोलीन जैसे अधिकांश तेल तिलहन कीमतों में गिरावट आई।

वहीं कम आवक और डीआयल्ड केक (डीओसी) की मांग होने से सोयाबीन तिलहन कीमतों में मजबूती दर्ज हुई। खाने वालों की मांग बढ़ने तथा पेराई में बेपरता भाव बैठने के कारण मूंगफली तेल तिलहन कीमतें पूर्वस्तर पर बनी रहीं।

बाजार से जुड़े कारोबारी सूत्रों ने कहा कि शिकॉगो एक्सचेंज में शुक्रवार रात लगभग तीन प्रतिशत की गिरावट आने का असर सोमवार के कारोबार पर पड़ने की संभावना है।

उन्होंने कहा कि मंडियों में सोयाबीन तिलहन की आवक पहले के लगभग पांच लाख बोरी से घटकर साढ़े तीन लाख बोरी रह गई जबकि कपास गांठ की आवक पहले के 1.15 लाख गांठ से घटकर शुक्रवार को 90,000 गांठ और शनिवार को घटकर लगभग 80,000 गांठ रह गयी। इसकी वजह यह ह कि किसान मंडियों में कम आवक ला रहे हैं। मंडियों में मिल रही कीमत न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से अधिक होने के बावजूद किसानों को वह पहले मिल चुके ऊंचे भाव से कम लग रहा है। ऐसे किसानों को अपना माल मंडियों और तेल मिलों तक लाने के लिए कुछ प्रोत्साहन देना चाहिए।

सूत्रों ने कहा कि सोयाबीन और पामोलीन तेल की कीमतों में फिलहाल फर्क बहुत ज्यादा है और आगे गरम मौसम शुरु होते ही यह फर्क घटता जायेगा।

सूत्रों के मुताबिक, सरकार की कोटा प्रणाली के तहत शुल्क-मुक्त आयात से किसान, तेल उद्योग, उपभोक्ता और सरकार किसी को भी फायदा नहीं हो रहा और सूरजमुखी और सोयाबीन जैसे हल्के तेल के दाम में मनोवांछित कमी भी नहीं आई है। ऐसी छूट अगर डीओसी का निर्यात करने वाली तेल प्रसंस्करण मिलों को दी गई होती तो कई समस्याओं का हल एक साथ निकल जाता। ऐसी मिलें किसानों से सारा माल अच्छे दाम पर खरीद कर कम दाम पर तेल उपलब्ध करा सकती थीं और इस कमी की भरपाई डीओसी के निर्यात से पूरा कर लेंती।

सूत्रों ने कहा कि खबरों में खाद्यतेलों के दाम में मामूली वृद्धि पर भी हाय तौबा मच जाती है लेकिन जिस बिनौला खल (देश में कुल खल उत्पादन का 80 प्रतिशत हिस्सा) के महंगा होने से दूध और दुग्ध उत्पादों के दाम बढ़ने के बारे में कोई भी नहीं बोल रहा है। तिलहन की प्रति व्यक्ति खपत प्रतिदिन (रिपीट प्रतिदिन) लगभग 50 ग्राम के आसपास होती है लेकिन दूध एवं दुग्ध उत्पादों की प्रति व्यक्ति खपत, तिलहन खपत के मुकाबले कई गुना अधिक है और महंगाई इन उत्पादों के कारण कहीं अधिक बढ़ती है। इस तरह तेल तिलहन का कारोबार से खल, डीओसी भी जुड़ा है जिससे दूध, दुग्ध उत्पाद, अंडे, मुर्गी मांस इत्यादि की कीमतें भी प्रभावित होती हैं।

उन्होंने कहा कि तेल की कमी को, कम तेल खाकर या किसी अन्य सस्ते तेल के आयात से पूरा किया जा सकता है लेकिन दूध और दुग्ध उत्पादों की कमी को पूरा करने का कोई विकल्प नहीं है। सरकार को इन दोनों ही पहलुओं को ध्यान में लेकर तेल तिलहन कारोबार के संदर्भ में कोई फैसला करना होगा। सरकार को सबसे पहले कोटा व्यवस्था समाप्त कर आयात शुल्क लगाकर आयात खोल देना चाहिये या निर्यातोन्मुख तेल प्रसंस्करण मिलों को यह छूट देनी चाहिये।

सूत्रों के मुताबिक, सरकार को सबसे पहले सूरजमुखी और सोयाबीन जैसे हल्के तेलों के आयात पर अंकुश लगाने के बारे में सोचना होगा। पामोलीन के ज्यादातर गरीब वर्ग के लोगों का भोजन होने से उसके आयात को प्रतिबंधित न भी किया जाय तो उचित होगा। एक दो माह के भीतर किसान द्वारा 15 जनवरी, 2023 के बाद देश में सूरजमुखी और सोयाबीन डीगम में भारी मात्रा में खाद्यतेलों की आवक होगी क्योंकि लोगों ने काफी आयात के आर्डर दे रखे हैं। इसमें आगामी आयातित सोयाबीन तेल का भाव, इस तेल के मौजूदा भाव से भी कम है। सोयाबीन तेल का मौजूदा थोक भाव 119.50 रुपये किलो है जबकि आगे आने वाले सोयाबीन तेल का भाव लगभग 117 रुपये किलो है।

शनिवार को तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:

सरसों तिलहन - 6,945-6,995 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली - 6,535-6,595 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) - 15,400 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली रिफाइंड तेल 2,460-2,725 रुपये प्रति टिन।

सरसों तेल दादरी- 13,950 रुपये प्रति क्विंटल।

सरसों पक्की घानी- 2,130-2,260 रुपये प्रति टिन।

सरसों कच्ची घानी- 2,190-2,315 रुपये प्रति टिन।

तिल तेल मिल डिलिवरी - 18,900-21,000 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 13,950 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 13,600 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 11,950 रुपये प्रति क्विंटल।

सीपीओ एक्स-कांडला- 8,700 रुपये प्रति क्विंटल।

बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 12,15 0 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 10,300 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन एक्स- कांडला- 9,300 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।

सोयाबीन दाना - 5,650-5,750 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन लूज- 5,470-5,490 रुपये प्रति क्विंटल।

मक्का खल (सरिस्का)- 4,010 रुपये प्रति क्विंटल।

राजेश राजेश प्रेम

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

(The above story first appeared on LatestLY on Dec 31, 2022 09:18 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).