जरुरी जानकारी | सरकार के हस्तक्षेप से गेहूं, चीनी और चावल की कीमतों में गिरावट का रुख: खाद्य सचिव

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. खाद्य सचिव सुधांशु पांडेय ने बृहस्पतिवार को कहा कि सरकार की तरफ से लिए गए उपायों के बाद गेहूं, चावल, चीनी और खाद्य तेलों की खुदरा कीमतों में गिरावट का रुख देखने को मिल रहा है।

नयी दिल्ली, दो जून खाद्य सचिव सुधांशु पांडेय ने बृहस्पतिवार को कहा कि सरकार की तरफ से लिए गए उपायों के बाद गेहूं, चावल, चीनी और खाद्य तेलों की खुदरा कीमतों में गिरावट का रुख देखने को मिल रहा है।

सरकार ने बढ़ती मुद्रास्फीति के बीच 13 मई को गेहूं के निर्यात पर रोक लगा दी थी। इसके बाद चीनी के निर्यात की सीमा को घटाकर प्रति वर्ष एक करोड़ टन कर दिया था। इसके अलावा प्रमुख खाद्य तेलों पर आयात शुल्क को भी घटा दिया था।

पांडेय ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘कई कदम उठाने के बाद सभी चुनौतियों के बावजूद इनका असर दिख रहा है। मैं यह नहीं कह रहा कि चुनौतियां एक दम से खत्म हो गई है। ये अभी बनी रहेंगी। इन सब चुनौतियों के बावजूद कीमतों में गिरावट का रुख सरकार के हस्तक्षेप के कारण हुआ है।’’

उन्होंने कहा कि पिछले एक सप्ताह में आटे की औसत खुदरा कीमत 0.30 प्रतिशत घटकर 33.4 रुपये प्रति किलो हो गई है। वहीं गेहूं के भाव में भी गिरावट का रुख आया है और इसका भाव एक जून को 29.8 रुपये प्रति किलो है।

पांडेय ने कहा, ‘‘गेहूं में कीमतों में अब कमी आ रही है। गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने से 19 दिन पहले खुदरा गेहूं की कीमतों में 0.74 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी। अब, गेहूं के भाव में केवल 0.47 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।’’

उन्होंने कहा कि इस तरह का रुख गेहूं और आटे की कीमतों में भी देखा गया है।

वहीं, चावल को लेकर सचिव ने कहा कि चावल का औसत भाव स्थिर बना हुआ और खुदरा और थोक दोनों बाजारों में इसकी कीमतों में मामूली गिरावट भी देखी गई है।

खाद्य तेलों के मामले में पांडेय ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोयाबीन और सूरजमुखी के दाम एक साल पहले 35 प्रतिशत बढ़े थे, लेकिन घरेलू स्तर पर उत्पादन बढ़ने की वजह से हम इसके प्रभाव से ‘बच’ सके।

एक सप्ताह से खाद्य तेल कीमतों में गिरावट का रुख है।

उन्होंने कहा कि चीनी का औसत खुदरा दाम 41.50 रुपये प्रति किलो है। पिछले एक माह में चीनी की कीमतों में 50 पैसे प्रति किलोग्राम की कमी आई है।

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