जरुरी जानकारी | खाद्य तेल-तिलहन के भाव में गिरावट
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नयी दिल्ली, 15 फरवरी दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में बुधवार को कारोबार के दौरान मंगलवार के मुकाबले कमजोरी का रुख देखने को मिला तथा मूंगफली तेल-तिलहन को छोड़कर बाकी तेल-तिलहनों के भाव हानि दर्शाते बंद हुए।
बाजार के जानकार सूत्रों ने कहा कि मलेशिया एक्सचेंज में 0.55 प्रतिशत की गिरावट रही जबकि शिकॉगो एक्सचेंज कल रात 1.5 प्रतिशत टूटा था और फिलहाल यह कमजोर है। सामान्य कारोबार के बीच मूंगफली तेल- तिलहन के भाव पूर्वस्तर पर बंद हुए।
सूत्रों ने कहा कि पिछले तीन माह में सस्ता आयात बढ़ने के कारण सरसों, सोयाबीन तेल-तिलहन, कच्चा पामतेल (सीपीओ) एवं पामोलीन और बिनौला तेल कीमतों में गिरावट आई।
सूत्रों ने कहा कि तेल-तिलहन बाजार के मिजाज को पहले समझना जरूरी है तभी इसमें स्थितियों को काबू में लाया जा सकता है। तेल के दाम जो घटते या बढ़ते हैं, उसकी तुलना पहले दिन के भाव से की जाती है इसलिए वह वास्तविक स्थिति को पूरी तरह नहीं दर्शाता। वास्तविक स्थिति समझने के लिए एक दो महीने पहले के भाव को ध्यान में रखने की जरूरत है। जैसे कि मौजूदा समय में खाद्य तेलों के भाव पांच- छह महीने पहले के भाव के मुकाबले लगभग आधे से भी ज्यादा टूट चुके हैं और पिछले दिन के भाव के मुकाबले यदि खाद्य तेल कीमत में दो रुपये की मजबूती आती है तो कुछ महीने पहले के भाव के मुकाबले वह काफी कम ही रहेगी और इसे तेजी नहीं कहा जा सकता।
सूत्रों ने कहा कि कुछ तेल विशेषज्ञ कह रहे हैं कि इस बार सरसों का रिफाइंड बनेगा लेकिन उन्हें यह समझना होगा कि पहले पुरानी सरसों खपे तो आगे के अनुमान लगाये जा सकते हैं। वैसे पिछले छह महीने से खाद्य तेलों के दाम टूटते जा रहे थे तो अधिकांश लोगों ने शुल्कमुक्त कोटा प्रणााली के तहत किये जा रहे आयात के बारे में नहीं बोला कि इसका देश के घरेलू तेल-तिलहन उद्योग पर क्या असर आयेगा। इसी तरह खाद्य तेलों के थोक भाव टूटने के बावजूद शुल्कमुक्त आयातित तेल को प्रीमियम के साथ बेचे जाने पर भी लोगों ने चुप्पी साध रखी थी। देश को तेल-तिलहन में आत्मनिर्भरता की ओर ले जाने में इन बातों का खास महत्व है।
सूत्रों ने कहा कि देशी ‘सॉफ्ट आयल’ (नरम तेलों) से मवेशी चारे और मुर्गीदाने के लिए खल और डीआयल्ड केक (डीओसी) की प्राप्ति होती है। इसलिए आयात पर निर्भरता को घटाने और विदेशी मुद्रा को बचाने के लिए हमें खुद का उत्पादन बढ़ाने पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिये। यूक्रेन-रूस युद्ध आरंभ होने के समय खाद्य तेलों की कमी के बीच हमारी सरसों ने ही स्थिति को संभालने में मदद की थी।
बुधवार को तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:
सरसों तिलहन - 5,850-5,900 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली - 6,475-6,535 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) - 15,450 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली रिफाइंड तेल 2,420-2,685 रुपये प्रति टिन।
सरसों तेल दादरी- 12,140 रुपये प्रति क्विंटल।
सरसों पक्की घानी- 1,950-1,980 रुपये प्रति टिन।
सरसों कच्ची घानी- 1,910-2,035 रुपये प्रति टिन।
तिल तेल मिल डिलिवरी - 18,900-21,000 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 12,320 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 12,050 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 10,600 रुपये प्रति क्विंटल।
सीपीओ एक्स-कांडला- 8,650 रुपये प्रति क्विंटल।
बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 10,750 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 10,350 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन एक्स- कांडला- 9,400 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।
सोयाबीन दाना - 5,450-5,580 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन लूज- 5,190-5,210 रुपये प्रति क्विंटल।
मक्का खल (सरिस्का)- 4,010 रुपये प्रति क्विंटल।
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