विदेश की खबरें | न्यूजीलैंड में कोविड-19 के बीच भी स्कूल खोले रखने का फैसला, विभिन्न समुदायों के सामने पैदा हुआ खतरा

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. ड्यूनडिन (न्यूजीलैंड), 10 जून (द कन्वरसेशन) कोविड-19 महामारी का प्रकोप अभी पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है, ऐसे में न्यूजीलैंड सरकार की स्कूल खोले रखने की नीति के चलते विभिन्न समुदायों के व्यापक संक्रमण की चपेट में आने और पढ़ाई में बाधा पैदा होने की आशंका बढ़ गई है।

ड्यूनडिन (न्यूजीलैंड), 10 जून (द कन्वरसेशन) कोविड-19 महामारी का प्रकोप अभी पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है, ऐसे में न्यूजीलैंड सरकार की स्कूल खोले रखने की नीति के चलते विभिन्न समुदायों के व्यापक संक्रमण की चपेट में आने और पढ़ाई में बाधा पैदा होने की आशंका बढ़ गई है।

न्यूजीलैंड में सर्दी आने पर कोविड-19 और अन्य सांस संबंधी मौसमी संक्रमण से बच्चों, कर्मचारियों और उनके परिवारों के बचाव को लेकर स्कूलों के लिए कार्य योजना की जरूरत है।

पहले टर्म के दौरान शिक्षा मंत्रालय ने स्कूलों को सलाह दी थी कि वे अभिभावकों को आश्वस्त करें कि स्कूलों में संक्रमण से बचाव के लिए हरसंभव उपाय किए गए हैं। मीडिया में आईं खबरों में बताया गया है कि ज्यादातर बच्चों में कोविड-19 होने के लक्षण दिखाई नहीं देते हैं या फिर वे मामूली रूप से बीमार होते हैं। कुछ सप्ताह के भीतर उनके पूरी तरह संक्रमण से उबरने की संभावना रहती है।

ये आश्वासन अत्यधिक आशावादी लग रहे हैं। हालांकि पांच से 11 साल के बच्चों को स्कूलों में पहला टर्म शुरू होने से दो सप्ताह पहले टीके की पहली खुराक लेने के योग्य करार दिया गया था। ऐसे में कम समय दिए जाने के चलते अधूरी तैयारियों के साथ बच्चों का टीकाकरण शुरू कर दिया गया।

इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय साक्ष्यों से स्पष्ट हो चुका है कि लंबे समय तक कोविड-19 के लक्षण रहना एक वास्तविकता है और चिंता का विषय भी है। साथ ही यह भी स्पष्ट हो चुका है कि ओमीक्रोन स्कूलों में फैल रहा है। ऐसे में बच्चों, स्कूल कर्मचारियों और अभिभावकों के कोविड-19 की चपेट में आने का खतरा अब भी कायम है।

कोविड-19 से बचाव के मजबूत सुरक्षा उपायों और पारदर्शी जानकारी प्रदान किए बिना स्कूल खोले रखने के निर्णय के चलते पढ़ाई में व्यवधान पैदा हुआ है। इसके चलते छात्रों, कर्मचारियों और परिवारों के सामने चिंताएं पैदा हो गई हैं।

इन व्यवधानों के कारण भविष्य की पीढ़ी के सामने कई गंभीर चिंताएं पैदा हो गई हैं।

सरकारी नेतृत्व की कमी ने स्कूल के कर्मचारियों पर अनावश्यक रूप से भारी बोझ डाला है, जिन्होंने अपनी कई मौजूदा जिम्मेदारियों को निभाने के साथ-साथ महामारी के प्रबंधन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

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