देश की खबरें | मुंबई से सीधी उड़ान न मिलने पर अहमदाबाद के रास्ते ब्रिटेन जाने का फैसला परिवार पर पड़ा भारी
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. लंदन के एक होटल में प्रबंधक के रूप में काम करने वाले जावेद अली सैयद अपने परिवार के तीन सदस्यों के साथ अपनी बीमार मां से मिलने भारत आए थे लेकिन मुंबई से सीधी उड़ान न मिलने के बाद उन्होंने अहमदाबाद के रास्ते लंदन जाने का फैसला किया और यह उनकी अंतिम यात्रा साबित हुई।
मुंबई, 14 जून लंदन के एक होटल में प्रबंधक के रूप में काम करने वाले जावेद अली सैयद अपने परिवार के तीन सदस्यों के साथ अपनी बीमार मां से मिलने भारत आए थे लेकिन मुंबई से सीधी उड़ान न मिलने के बाद उन्होंने अहमदाबाद के रास्ते लंदन जाने का फैसला किया और यह उनकी अंतिम यात्रा साबित हुई।
मुंबई के मलाड ईस्ट से ताल्लुक रखने वाले ब्रिटिश नागरिक जावेद अली, अपनी पत्नी मरियम (35) और दो बच्चों ज़ैन (छह) व अमानी (चार) के साथ एअर इंडिया के उस विमान में सवार थे, जो बृहस्पतिवार दोपहर उड़ान भरने के तुरंत बाद अहमदाबाद में दुर्घटनाग्रस्त हो गया।
बीमार मां को देखने के लिए जावेद अपने परिवार के साथ पिछले सप्ताह भारत आये था।
जावेद की मां को दिल की बीमारी है और उनका उपचार यहां जारी है।
जावेद 11 वर्ष पहले ब्रिटेन गए थे, जहां उनकी मुलाकात मरियम से हुई और उन्होंने उनसे शादी कर ली।
उन्होंने बाद में ब्रिटिश नागरिकता हासिल कर ली और लंदन के केंसिंग्टन में बस गए।
मरियम लंदन के मशहूर लग्जरी डिपार्टमेंट स्टोर ‘हैरोड्स’ में ब्रांड एंबेसडर के तौर पर काम करती थीं, जबकि जावेद बेस्ट वेस्टर्न केंसिंग्टन ओलंपिया होटल का प्रबंधन करते हैं।
जावेद के चचेरे भाई सऊद मेमन ने बताया, “वे (जावेद का परिवार) लंदन में खुशहाल जिंदगी जी रहे थे।”
जावेद के छोटे भाई इम्तियाज अली ने बताया, “वे अपनी मां का इलाज कराने और परिवार के साथ ईद-उल-अजहा मनाने के लिए यहां आए थे। चूकि उन्हें मुंबई से कोई सीधी उड़ान नहीं मिल पाई, इसलिए वे वापस लंदन जाने के लिए अहमदाबाद चले गए।”
विमान दुर्घटना के बाद, इम्तियाज और उनके चाचा शवों की पहचान करने में अधिकारियों की मदद करने के लिए डीएनए नमूने लेकर अहमदाबाद गये हैं।
इम्तियाज ने बताया कि लंबे अंतराल के बाद परिवार का भारत लौटना दुखद रहा और उन्हें अहमदाबाद जाने के जावेद के फैसले पर अफसोस है।
इम्तियाज के मुताबिक, जब तक उन्हें जावेद और उनके परिवार के सदस्यों के अवशेष नहीं मिल जाते, तब तक वे चैन से नहीं बैठेंगे।
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