देश की खबरें | रत्नागिरी में रिफाइनरी के खिलाफ हो रहे प्रदर्शनों से संवेदनशीलता से निपटें : अजित पवार

मुंबई, 25 अप्रैल महाराष्ट्र विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) विधायक अजित पवार ने मंगलवार को कहा कि रत्नागिरी में प्रस्तावित तेलशोधन कारखाने (रिफाइनरी) की परियोजना के खिलाफ स्थानीय लोगों द्वारा किए जा रहे प्रदर्शन से संवेदनशीलता से निपटना चाहिए।

उन्होंने साथ ही मांग की है कि राज्य सरकार को मुद्दे का शांतिपूर्ण समाधान होने तक सर्वेक्षण कार्य रोक देना चाहिए।

पवार ने कहा कि अगर पर्यावरण चिंताओं की वजह से विरोध हो रहा है तो विशेषज्ञों की मदद से लोगों की आशंकाओं को दूर किया जाना चाहिए।

यहां जारी बयान में पवार ने कहा कि जिले के बारसू में प्रस्तावित तेलशोधन कारखाना के खिलाफ प्रदर्शन की खबर दे रहे पत्रकारों की आवाज को ‘दबाने’ की कोशिश बंद होनी चाहिए।

उल्लेखनीय है कि अजित पवार का बयान ऐसे समय आया है जब तटीय जिले रत्नागिरी में अरबों डॉलर की तेलशोधन कारखाना परियोजना के लिए मृदा सर्वेक्षण कार्य का स्थानीय लोग विरोध कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘लोकतंत्र में सभी को विरोध करने का अधिकार है। प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया जा रहा है। सरकार को स्थानीय लोगों की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए और संवेदनशीलता के साथ मुद्दे से निपटना चाहिए।’’

पवार ने कहा कि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को संवाद से समस्या का समाधान निकालना चाहिए और ‘‘जब तक यह नहीं होता (तेल शोधन कारखाना के लिए) सर्वेक्षण कार्य को रोक देना चाहिए।’’

बारामती में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए पवार ने कहा, ‘‘(परियोजना के) विरोध के पीछे के कारणों पर विचार किया जाना चाहिए। अगर विरोध पर्यावरण चिंताओं को लेकर है तो आशंकाओं को विशेषज्ञों की मदद से दूर किया जाना चाहिए।’’

रांकापा के वरिष्ठ नेता ने कहा कि जब एनरॉन बिजली परियोजना का प्रस्ताव किया गया था तब भी बड़ी संख्या में लोगों ने विरोध किया था। हालांकि, विरोध कम होने पर परियोजना पर आगे बढ़ा गया।

तेलशोधन कारखाने को लेकर राकांपा के रुख के बारे में पूछे जाने पर पवार ने कहा कि उनकी पार्टी विकास की समर्थक है लेकिन साथ ही परियोजना का नकारात्मक असर पर्यावरण पर नहीं होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि अगर कोई आशंका होती है या मुआवजे का मुद्दा उठाया जाता है तो उस पर भी विचार किया जाना चाहिए।

गौरतलब है कि तेलशोधन कारखाने की परियोजना शुरुआत में जिले के नाणार में प्रस्तावित थी, लेकिन स्थानीय लोगों के प्रदर्शन की वजह से पूर्ववर्ती उद्धव ठाकरे सरकार ने केंद्र को अरबों डॉलर की इस परियोजना को बारसू में स्थानांतरित करने का सुझाव दिया।

हालांकि, बारसू में भी स्थानीय लोगों द्वारा परियोजना का विरोध किया जा रहा है।

रत्नागिरी जिले के जैतापुर में ही दुनिया का सबसे बड़ा परमाणु ऊर्जा पार्क बनने जा रहा है और इस परियोजना का भी स्थानीय लोग विरोध कर रहे हैं।

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