देश की खबरें | डीसीडब्ल्यू ने दिल्ली के एक निजी अस्पताल में ईडब्ल्यूएस मरीजों के साथ भेदभाव का आरोप लगाया

नयी दिल्ली, नौ अगस्त दिल्ली महिला आयोग (डीसीडब्ल्यू) ने आरोप लगाया है कि एक निजी अस्पताल आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के मरीजों के साथ ‘दुर्व्यवहार और भेदभाव’ कर रहा है।

आयोग ने बुधवार को एक बयान में कहा कि स्वास्थ्य सेवाएं महानिदेशक (डीजीएचएस) ने अस्पताल को ईडब्लयूएस और पैसे देकर इलाज कराने वाले मरीजों का क्षेत्र अलग-अलग नहीं रखने का निर्देश दिया। साथ ही, दोनों श्रेणियों के लिए एक ही प्रतीक्षालय रखने का निर्देश दिया।

बयान में कहा गया है कि अस्पताल को यह सुनिश्चित करने को भी कहा गया है कि ईडब्ल्यूएस मरीजों के इलाज की सुविधाएं पैसे देकर इलाज कराने वाले मरीजों के समान होनी चाहिए।

डीसीडब्ल्यू को अस्पताल के दुर्व्यवहार के बारे में आयोग की एक पूर्व सदस्य जूही खान से एक शिकायत मिली थी।

आयोग ने एक बयान में कहा, ‘‘डीसीडब्ल्यू ने ईडब्ल्यूएस मरीजों के साथ दुर्व्यवहार और भेदभाव करने को लेकर शहर के एक निजी अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित की है। उन्होंने बताया कि एक निजी अस्पताल--मधुकर रेनबो हॉस्पिटल, मालवीय नगर ईडब्ल्यूएस श्रेणी के मरीजों के साथ भेदभाव कर रहा है।’’

अस्पताल ने एक बयान में कहा कि डीजीएचएस के अधिकारियों ने 28 जुलाई को संस्थान का दौरा किया था।

इसमें कहा गया है, ‘‘हमने अपनी ओर से पूरा सहयोग किया और अनुरोध के अनुसार सूचना साझा की।’’

आयोग ने आरोप लगाया कि अस्पताल ईडब्ल्यूएस मरीजों को चिह्नित कर उन्हें संस्थान के भूमिगत तल (कार पार्किंग क्षेत्र) में बैठा रहा है, जहां बैठने की कोई उपयुक्त व्यवस्था या वातानुकूलन (एसी) नहीं है।

यह भी आरोप लगाया कि ईडब्ल्यूएस मरीज का इलाज नियमित चिकित्सक के बजाय दूसरे चिकित्सक कर रहे हैं।

आयोग ने डीजीएचएस, दिल्ली को नोटिस जारी किया और विषय में एक कार्रवाई रिपोर्ट तलब की।

नोटिस के बाद, डीजीएचएस की एक टीम ने अस्पताल का औचक निरीक्षण किया और वहां अव्यवस्था पाई।

आयोग ने कहा, ‘‘उन्होंने पाया कि अस्पताल के प्रवेश और निकास द्वार पर ईडब्ल्यूएस डिस्प्ले बोर्ड नहीं था। उन्होंने यह भी पाया कि ईब्ल्यूएस मरीजों के इलाज के लिए चिकित्सक का कक्ष बहुत छोटा था, जिसमें चिकित्सकीय जांच के लिए जगह नहीं थी।

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