विदेश की खबरें | नवंबर में होने वाले अमेरिकी चुनाव को साइबर खतरा

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. ‘रैनसमवेयर’, एक दुर्भावनापूर्ण सॉफ़्टवेयर है, जो कंप्यूटर में फाइलों को लॉक कर देता है और उन फाइलों को अनलॉक करने के लिये उपयोगकर्त्ता से पैसे मांगता है।

‘रैनसमवेयर’, एक दुर्भावनापूर्ण सॉफ़्टवेयर है, जो कंप्यूटर में फाइलों को लॉक कर देता है और उन फाइलों को अनलॉक करने के लिये उपयोगकर्त्ता से पैसे मांगता है।

एफबीआई और होमलैंड सिक्युरिटी विभाग ने इस सिलसिले में स्थानीय सरकारों को परामर्श जारी किये हैं, जिनमें इन हमलों को रोकने के लिये सुझाव भी शामिल हैं।

यह भी पढ़े | Kulbhushan Jadhav Case: इस्लामाबाद हाईकोर्ट का इमरान सरकार को निर्देश, कुलभूषण जाधव के वकील की नियुक्ति के लिए भारत को मिले मौका.

होमलैंड सिक्युरिटी की साइबर सुरक्षा एवं बुनियादी ढांचा सुरक्षा एजेंसी से संबद्ध एक शीर्ष चुनाव सुरक्षा अधिकारी जियोफ हेले ने कहा, ‘‘हम देख रहे हैं कि राज्य एवं स्थानीय इकाइयों को रैनसमवेयर प्रतिदिन निशाना बना रहे हैं। ’’

रैनसमवेयर का लक्षित राज्य एवं स्थानीय सरकारों पर हमला बढ़ता जा रहा है, साइबर अपराधी डेटा पर कब्जा कर जल्द पैसा बनाना चाहते हैं।

यह भी पढ़े | पाकिस्तान में COVID-19 के 330 नए मामले आए सामने, संक्रमितों की कुल संख्या हुई 2,80,027.

मुख्य डर इस बात का है कि इस तरह के हमले निर्वाचक डेटाबेस सहित व्यापक सरकारी नेटवर्क में सेंध लगा कर प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से मतदान प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं।

यदि रैनसमवेयर हमला चुनाव में व्यवधान डालने में नाकाम भी हो जाता है तो भी चुनाव विश्वसनीय नहीं रहेगा।

हालांकि, 2016 के बाद मतदाता पंजीकरण प्रणाली की सुरक्षा बेहतर करने के लिये उठाये गये कदमों से सरकारों को चुनाव से जुड़े रैनसमवेयर हमलों से निजात पाने में मदद मिल सकती है।

एपी

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now

\