श्रीनगर, चार फरवरी जम्मू-कश्मीर के पुलवामा से पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के विधायक वहीद पारा ने मंगलवार को कहा कि देश की आपराधिक न्याय प्रणाली में आमूलचूल सुधार की जरूरत है, क्योंकि “अभियोजन की धीमी गति से आरोपी और उनके परिजन अनिश्चितता में घिरे रहते हैं।”
पारा गैर-कानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत दर्ज आतंकवादी वित्त पोषण के एक मामले में सुनवाई का सामना कर रहे हैं।
उन्होंने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में अपने खिलाफ मुकदमे का स्पष्ट संदर्भ देते हुए लिखा, “विचाराधीन कैदी हमेशा विचाराधीन ही रहता है।”
पारा ने कहा, “30 दिन में पांच सुनवाई और तीन अदालत के चक्कर-यूएपीए के तहत कार्यवाही अपने आप में एक सजा है। यहां तक कि अदालतों के पास भी राहत देने का बहुत कम अधिकार है। यूएपीए के दो मामलों, दो अन्य मामलों और ऊपरी आदालतों में तीन निरस्तीकरण याचिकाओं के साथ, यह चक्र अंतहीन है।”
पीडीपी विधायक ने कहा, “मुकदमे की धीमी गति से सिर्फ अभियुक्त ही नहीं फंसा रहता, बल्कि उसके पूरे परिवार को भी सजा मिलती है और वे कई वर्षों तक अनिश्चितताओं से घिरे रहते हैं।”
उन्होंने कहा, “यह केवल कानूनी लड़ाई के बारे में नहीं है; यह जीवन के अनिश्चितकाल तक अधर में लटके जीवन के बारे में है। इंसाफ का मतलब अंतहीन कैद नहीं हो सकता।”
पारा ने कहा कि जब विधायक चुने जाने के बाद भी उन्हें ऐसी स्थिति से गुजरना पड़ रहा है, तो वह कल्पना भी नहीं कर सकते कि आम नागरिकों को कितनी तकलीफ का सामना करना पड़ता होगा।
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