देश की खबरें | "गोहत्या गलत, लेकिन आवारा जानवरों के कारण समस्या बढ़ी"
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. (यह पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बदलते राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य पर हमारी श्रृंखला का हिस्सा है... तस्वीरों के साथ)
(यह पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बदलते राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य पर हमारी श्रृंखला का हिस्सा है... तस्वीरों के साथ)
मेरठ (उप्र) नौ मार्च पश्चिमी उत्तर प्रदेश में चिलचिलाती धूप में गन्ने से लदी ट्रैक्टर-ट्रालियां राजमार्ग पर नजर आईं, जिनके आसपास खड़े लोग उन्हें आवारा जानवरों से बचाने की कोशिश कर रहे थे।
मेरठ जिले में गंग नहर के नजदीक कांटे (तोल मशीन) के पास बैठे जुम्मा (72) ‘मिल’ पहुंचने से पहले अपने गन्नों की आवारा जानवरों से रक्षा करते नजर आए।
क्षेत्र में आवारा जानवरों की संख्या काफी बढ़ रही और इसके लिए विभिन्न धर्म के लोगों ने राज्य में उनके मारने पर लगी रोक को जिम्मेदार ठहराया है।
जुम्मा (72) दिल्ली से लगी सीमाओं पर 100 से अधिक दिनों से जारी किसानों के आंदोलन से भी अवगत दिखे। वहीं, उन्होंने फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्यों (एमएसपी) की कानूनी गारंटी को लेकर भी चिंता जाहिर की।
उन्हीं की तरह अकबर अली ने भी अपनी फसलों की जानवरों से रक्षा के लिए कुछ लोगों को काम पर रखा है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ में अपनी फसलों को आवारा जानवरों से बचाने के लिए लोगों को नौकरी पर रखने वाले मजबूर किसान सरकार से उनके समुदाय की अधिक मदद करने की उम्मीद भी कर रहे हैं।
जुम्मा ने बताया कि वह केन्द्र सरकार के एक ‘वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन’ के लिए काम करते थे। उन्हें ज्यादातर घर से दूर रहना पड़ा और करीब एक दशक पहले वह मेरठ वापस आए।
उन्होंने ‘पीटीआई-’ से कहा, ‘‘ यहां मेरे गांव में, नगलामल चीनी मिल ने मुझे और कुछ स्थानीय लोगों को फसलों की आवारा जानवरों से रक्षा करने के लिए रखा है। शुरुआत में यह आम सा काम लगा और उससे मुझे कुछ पैसे भी मिल रहे थे।’’
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