देश की खबरें | न्यायालय ने श्रमिकों के साथ पुलिस की ज्यादतियों का संज्ञान लिया

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि कोविड-19 महामारी के दौर में देश में लागू लॉकडाउन के दौरान रोजगार गंवाने की वजह से अपने पैतृक स्थलों की ओर जाने के लिये बाध्य हुये कामगारों के साथ पुलिस और दूसरे प्राधिकारियों को मानवीय तरीके से पेश आना होगा क्योंकि वे पहले से ही विपदाओं का सामना कर रहे हैं।

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नयी दिल्ली, नौ जून उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि कोविड-19 महामारी के दौर में देश में लागू लॉकडाउन के दौरान रोजगार गंवाने की वजह से अपने पैतृक स्थलों की ओर जाने के लिये बाध्य हुये कामगारों के साथ पुलिस और दूसरे प्राधिकारियों को मानवीय तरीके से पेश आना होगा क्योंकि वे पहले से ही विपदाओं का सामना कर रहे हैं।

न्यायमूर्ति अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली पीठ ने पलायन करने वाले इन कामगारों के साथ पुलिस और सुरक्षाबलों की ज्यादतियों का संज्ञान लिया और कहा कि संबंधित पुलिस महानिदेशक या पुलिस आयुक्त इस बारे में उचित निर्देश जारी कर सकते हैं।

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पीठ ने इन श्रमिकों की दयनीय स्थिति का स्वत: संज्ञान लिये गये मामले में वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से सुनाये गये अपने आदेश में कहा, ‘‘रोजगार के अवसर खत्म होने की वजह से पहले से ही बेहाल ये कामगार अपने पैतृक स्थान जाने के लिये बाध्य थे। ऐसी स्थिति में आर्थिक परेशानियों से जूझ रहे इन कामगारों के साथ पुलिस और दूसरे प्राधिकारियों को मानवीय तरीके से पेश आना होगा।’’

पीठ ने अपने 30 पेज के आदेश में कहा, ‘‘रिकार्ड में उपलब्ध सामग्री से हम यह भी नोटिस करते हैं कि राज्यों के पुलिस अधिकारी, अर्द्धसैनिक बल अपनी तैनाती के स्थानों पर शानदार काम कर रहे हैं लेकिन पलायन कर रहे इन कामगारों के मामले में कुछ ज्यादतियों की घटनायें भी हुयी हैं।’’

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न्यायालय ने कहा कि पुलिस और प्रशासन के ज्यादातर अधिकारी पूरी मेहनत और निष्ठा के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे हैं लेकिन फिर भी कुछ खामियों की ओर ध्यान देकर उन्हें दूर करने के लिये कार्रवाई करने की आवश्यकता है।

शीर्ष अदालत ने अपने इस आदेश में केन्द्र और सभी राज्य सरकारों को निर्देश दिये हैं कि रास्तों में फंसे कामगारों को 15 दिन के भीतर ट्रेन या बसों से उनके गंतव्य स्थान तक पहुंचाया जाये।

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