देश की खबरें | न्यायालय ने दत्तक माता-पिता को बच्चे की अभिरक्षा जैविक माता-पिता को सौंपने का आदेश रद्द किया

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. बंबई उच्च न्यायालय ने शनिवार को एक दीवानी अदालत के मार्च 2023 के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें दो साल के एक बच्चे के दत्तक माता-पिता को सुनवाई लंबित रहने तक बच्चे की अभिरक्षा उसके जैविक माता-पिता को सौंपने का निर्देश दिया गया था।

मुंबई, 19 अगस्त बंबई उच्च न्यायालय ने शनिवार को एक दीवानी अदालत के मार्च 2023 के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें दो साल के एक बच्चे के दत्तक माता-पिता को सुनवाई लंबित रहने तक बच्चे की अभिरक्षा उसके जैविक माता-पिता को सौंपने का निर्देश दिया गया था।

न्यायमूर्ति शर्मिला देशुमख की एकल पीठ ने कहा कि निचली अदालत का आदेश माता-पिता को सबूत पेश करने का कोई मौका दिये बिना संक्षिप्त तरीके से पारित किया गया था और मामले का फैसला हलफनामों के आधार पर किया गया था।

उच्च न्यायालय ने कहा, ‘‘यह ध्यान में रखते हुए कि गोद लेने की शर्तों के अनुपालन को ध्यान में रखा जाना आवश्यक था, उस संदर्भ में मुद्दों को तैयार करना और साक्ष्य पेश करने की अनुमति देना भी आवश्यक था और चूंकि ऐसा नहीं किया गया था, इसलिए गोद लेने की वैधता स्थापित करने के लिए कोई भी विश्वसनीय या ठोस सबूत रिकॉर्ड पर लेने का कोई सवाल ही नहीं था।’’

उच्च न्यायालय दत्तक माता-पिता की ओर से दीवानी अदालत के उस आदेश के खिलाफ दायर याचिका की सुनवाई कर रहा था, जिसमें उनकी गोद लेने संबंधी याचिका खारिज कर दी गई थी।

दत्तक माता-पिता ने अपनी दत्तक याचिका खारिज करने के आदेश के खिलाफ दीवानी अदालत में एक पुनरीक्षण याचिका दायर की थी।

उन्होंने दावा किया कि उनकी पुनरीक्षण याचिका लंबित होने के बावजूद दीवानी अदालत ने उन्हें बच्चे की अभिरक्षा जैविक माता-पिता को सौंपने का निर्देश दिया।

दत्तक माता-पिता ने दावा किया है कि जैविक माता-पिता ने बच्चे को गोद दिया था और 16 जुलाई, 2021 को इस संबंध में एक विलेख निष्पादित किया था, हालांकि जैविक माता-पिता ने इससे इनकार किया है।

उच्च न्यायालय ने कहा, ‘‘इस तथ्यात्मक स्थिति के मद्देनजर कि बच्चा दो दिन का था तभी से वह दत्तक माता-पिता के साथ रह रहा है और दो साल बीत चुके हैं, ऐसे में बच्चे को अंतिम फैसले तक दत्तक माता-पिता के साथ रहने दिया जाए।’’

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