देश की खबरें | फोर्टिस हेल्थकेयर के पूर्व प्रवर्तक शिविंदर मोहन सिंह की अर्जी पर अदालत ने ईडी से जवाब मांगा

नयी दिल्ली, 22 जून दिल्ली उच्च न्यायालय ने रेलिगेयर फिनवेस्ट लिमिटेड (आरएफएल) में धन की कथित अनियमितता से जुड़े धनशोधन के मामले में गिरफ्तार फोर्टिस हेल्थकेयर के पूर्व प्रवर्तक शिविंदर मोहन सिंह की जमानत याचिका पर सोमवार को प्रवर्तन निदेशालय से जवाब मांगा।

न्यायमूर्ति अनूप जे भंभानी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई की और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को जमानत याचिका पर नोटिस जारी किया। अदालत ने निदेशालय को इस मामले में स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का भी निर्देश दिया हैं

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अदालत ने मामले को दो जुलाई को अगली सुनवायी के लिए सूचीबद्ध किया।

शिविंदर ने निचली अदालत द्वारा जमानत देने से इंकार करने के बाद उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है। निचली अदालत ने 18 जून को उनकी जमानत अर्जी इस आधार पर खारिज कर दी थी कि आरोपी ने कथित अपराध से अर्जित धन का इस्तेमाल किया है।

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निचली अदालत ने यह भी कहा था कि मामले में भारी रकम शामिल है जो कि 2,397 करोड़ रुपये है।

उच्च न्यायालय में सुनवायी के दौरान शिविंदर के वकील ने दलील दी कि चूंकि ईडी ने मामले में अपनी अभियोजन शिकायत या आरोपपत्र दाखिल कर दिया है, ऐसी स्थिति में उनके मुवक्किल को हिरासत में रखने से किसी उद्देश्य की पूर्ति नहीं होगी।

वकील ने दलील दी कि इस मामले में सभी साक्ष्यों की प्रकृति दस्तावेजी हैं और उनके खिलाफ सबूत से छेड़छाड़ के कोई आरोप नहीं हैं।

वकील ने अदालत को बताया कि सहआरोपी अनिल सक्सेना जिसे दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने मामले में गिरफ्तार किया था उसे उच्च न्यायालय ने जमानत दे दी है।

केंद्र सरकार के स्थायी अधिवक्ता अमित महाजन जो कि ईडी का प्रतिनिधित्व कर रहे थे, ने जमानत अर्जी का विरोध किया और कहा कि वर्तमान मामले में धनराशि की हेराफेरी की गई और इसका पता लगाना आसान नहीं है।

महाजन ने दलील दी कि शिविंदर को जमानत पर रिहा करने से आगे की जांच प्रभावित होगी और हाल में एक निचली अदालत ने उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया था और इस बारे में एक विस्तृत आदेश पारित किया था।

शिविंदर को इस मामले में कथित अपराध के लिए गत वर्ष धनशोधन रोकथाम कानून के तहत गिरफ्तार किया गया था।

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